बंगला ओल्डग्रांट का कब्जा प्रशासन का

कैंट बोर्ड: CBI खंगालेगी फाइल
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बंगला ओल्डग्रांट का कब्जा प्रशासन का, इस कैंट प्रशासन के उच्च पदस्थ अफसर देखते रहे गए और जिला प्रशासन ने छावनी के मेरठ साउथ स्थित ओल्ड ग्रांट का बंगला 235 कुर्क कर लिया यानि कब्जे में ले लिया। भारत सरकार के इन बंगलों की देखरेख को लेकर मेरठ कैंट के सैन्य व नागरिक अफसर कितने सजग है, इसकी भी कलई खुल गयी। छावनी के मेरठ साउथ एमपीजीएस कालेज के समीप स्थित ओल्डग्रांट का बंगला 235 जीएलआर यानि जनरल लैंड रजिस्टर में किसी गुप्ता संभवत प्रकाश गुप्ता के नाम दर्ज है। करीब दो हजार गज का बताया जा रहा यह बंगला कब बिक गया इसकी कोई अधिकृत जानकारी तो नहीं, लेकिन यह पक्का है कि यह बिक भी गया और कैंट के जिन अफसरों के जिम्मे भारत सरकार के इन बंगलों का रखाव है, वो पूरी तरह से अंजान बने रहे। कैंट बोर्ड की जानकारी रखने वालों की मानें तो ओल्ड ग्रांट के किसी भी बंगले की खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती। जो रहते हैं उनका मालिकाना हक केवल मलवे पर होता है, लेकिन यह सच है कि सोतीगंज के बदनाम चोरी के वाहनों का कटान करने के सरगाना  235 गल्ला एंड फैमली ने खरीद लिया था। बात जहां तक ओल्ड ग्रांट के बंगलों के खुदबुर्द होने की है तो 235 कोई पहला या इकलौता केस नहीं है, जिसमें अफसरों की कारगुजारिया या कहें लापरवाही सामने आयी है। ऐसे तमाम बंगले हैं जो खुदबुर्द किये जा चुके हैं या किए जा रहे हैं। उनका जिक इसी सीरीज की की अगली स्टोरी में जरूर मिलेगा।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई व कैंट अफसरों की चुप्पी पर सवाल:-235 की कुर्की को लेकर जहां पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल हैं, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार के इस बंगले के कुर्क होने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे कैंट अफसरों पर भी सवाल हैं। जानकारों का कहना है कि यदि कैंट अफसरों ने ड्यूटी की होती तो पुलिस प्रशासन इस 235 को कुर्क कर ही नहीं सकता था। दरअसल इस प्रकार के मामलों में एक लंबी प्रक्रिया है। पुलिस प्रशासन रक्षा संपदा अधिकारी को पत्र भेजते। उस पत्र पर डीईओ कार्यालय रिजमशन को लेकर एक अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजता। रक्षा मंत्रालय के आधीन जो बंगले हैं वो भारत सरकार यानि सेना के हैं और सेना सीधे भारत के राष्ट्रपति को रिपोर्ट करती है। इतना कुछ होने के बाद भारत सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी होता, तब कहीं जाकर पुलिस प्रशासन के लिए इस बंगले को रिज्यूम किए जाने का रास्ता साफ हो सकता। लेकिन पुलिस प्रशासन के अफसर हो या फिर कैंट अफसर किसी ने भी अपनी डयूटी को इस बंगला 235 के मुतालिक अपनी डयूटी को सही तरह से अंजाम नहीं दिया या फिर यह मान लिया जाए कि प्रक्रिया की जानकारी करने की लेशमात्र भी कोशिश नहीं की गई। हाजी गल्ला और बंगला 235: बकौल पुलिस सूत्र कैंट में गल्ला की करोड़ों की संपत्ति का जांच में सामने आयी। पड़ताल  में पता चला कि गल्ला की कैंट इलाके में करोड़ों रुपये की संपत्ति है। कैंट में फार्म हाउस खरीदा, जिसमें गल्ला ने गोदाम बनाया। कुल मिलाकर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई अपनी जगह ठीक हो सकती है, लेकिन भारत सरकार के बंगला 235 को लेकर कैंट अफसरों को जो कुछ करना चाहिए था, वो कुछ भी नहीं किया गया, यह भी कड़वी सच्चाई है।

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