साल 2014 में ही मना किया था हाईकोर्ट ने, कुछ कर्मचारी पहुंचे थे हाईकोर्ट, नियमितिकरण के आदेश चाहते थे हाईकोर्ट से
इलाहाबाद/मेरठ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त लहजे में की गई मनाही के बाद भी नगर निगम के अफसर बाज नहीं आए और पेराशूट के जरिये यानि तमाम कायदे कानून ताक पर रखकर कथित रूप से मोटी रकम लेकर कर्मचारियों को नियमित करने का सिलसिला जारी रखा गया, जो अब निगम अफसरों के गले की फांस बन गया है। इस मामले में मेरठ पुलिस को उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करनी है जो पेराशूट की जरिये यानि कायदे कानून ताक पर रखकर तेइस कर्मचारियों को नियमित करने के गुनाह में शामिल है। इस मामले में 23 फरवरी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ को हाईकोर्ट को यह बताना है कि तेइस कर्मचारियों को नियमित करने के कांड़ में शामिल अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है। जिन अफसरों के कार्यकाल में ये नियुक्तियां की गई हैं उनमें तेजपाल सिंह, नरेन्द्र कुशवाह, संजय कृष्ण, जेपी त्रिवेदी, विनोद यदुवंशी, संजय कृष्ण शामिल हैं। पुलिस को इनके खिलाफ ही कार्रवाई करनी है तथा हाईकोर्ट को अवगत कराना है।
ये है पूरा मामला
नगर निगम मेरठ में तमाम कायदे कानून ताक पर रखकर अधिकारियों ने अपने चहेते कर्मचारियों को नियमित करने का सिलसिला शुरू किया। इसको आधार बनाकर कुछ कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए। उनका तर्क था कि जिस प्रकार से अन्य कर्मचारियों को नियमित किया गया है, उसी आधार पर उन्हें भी नियमित किया जाए। हाईकोर्ट ने उनके तक मानने से एक सिरे से इंकार कर दिय और उत्तर प्रदेश शासन, मेरठ प्रशासन व नगर निगम प्रशासन को यह आदेश दिया कि जितने भी कर्मचारी नियम विरुद्ध नियमित किए गए हैं उनका नियमितिकरण समाप्त किया जाए। इतना ही नहीं जो सेलरी उन्हें बतौर नियमित कर्मचारी दी गयी है उसकी रिकबरी की जाए तथा इस गुनाह में शामिल निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए। साल 2014 तक महज 11 ही कर्मचारी नियमित किए गए थे, जिनका नियमितिकरण हाईकोर्ट ने अवैध माना था और जो कर्मचारी राहत की उम्मीद लेकर आए थे वो नाउम्मीद लौटा दिए गए।
हाईकोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन
हैरानी तो इस बात कि है इस कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में शासन में बैठे अफसरों, मेरठ प्रशासन और नगर निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया। इसके इतर यह किया कि अन्य 12 कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया। ऐसे कर्मचारियों की संख्या इसके चलते तेइस हो गयी। यह मामला अब तेइस कर्मचारियों पर आकर टिक गया है। तेइस कर्मचारियों के भर्ती घोटाले में निगम प्रशासन मसलन नगरायुक्त के स्तर पर जो कार्रवाई की जानी है अभी उसका इंतजार है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह का कहना है कि शासन की जांच, मंडालयुक्त व डीएम के स्तर से कराई गईं जांच के अलावा शासन के द्वारा इन कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनसे रिकबरी किए जाने के आदशे और इन सब के इतर हाईकोर्ट के आदेश, उसके बाद भी निगम प्रशासन के स्तर से कार्रवाई का ना किया जाना यह बता रहा है कि निगम अफसरों को हाईकोर्ट की का कोई खौफ बाकि नहीं रह गया है। वर्ना क्या वजह है कि शासन के लगातार आदेशों के बाद भी निगम के अफसर उन आदेशों का अनुपालन करने के बजाए उन पर कुंडली मारकर बैठ गए हैं।
ये हैं वो कर्मचारी जिनकी वजह से मुसीबत
जावेद पुत्र यूनुस चालक, अमरदेव पुत्र रामपाल लिपिक, महमूद अली पुत्र शमीउरहमान चालक, मनोज गौड़ पुत्र शिव कुमार चालक, सुनील कुमार पुत्र सोती सिंह सुपरवाइजर, दिनेश कुमार पुत्र रघुवीर सिंह लिपिक, मो. परवेज पुत्र यूनुस चालक, धर्मेंन्द्र उर्फ धर्मेंश पुत्र पारसनाथ लिपिकि, आलोक शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा कंप्यूटर ऑपरेटर, सुनील शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा कंप्यूटर ऑपरेटर, राजकुमार पटवारी, रूद्रेश पुत्र नानकचंदर पटवारी, मनोज पुत्र बुद्ध प्रकाश चालक, संजय पुत्र सुरेश, शम्स आरिफ पुत्र अब्दुल हकीम चालक, सतीश पुत्र निर्मल सिंह चालक, राजेश कुमार पुत्र पारस नाथ चालक, नौशाद अहमद अनुचर, नकुल वत्स योगेन्द्र शर्मा, हरबीर पुत्र रामकला लिपिक, शकेब खान पूर्व स्टैनो का साला, राजेन्द्र कोरी शामिल हैं।
इनके खिलाफ दर्ज है एफआईआर
नगर निगम का नियुक्ति अधिकारी, जावेद, अमरदेव, महमूद अली, मनोज कुमार गौड़, सुनील कुमार, दिनेश कुमार, मोहम्मद परवेज, धर्मेंद्र, आलोक शर्मा, सुनील शर्मा, सुनील दत्त शर्मा, राजकुमार, मनोज कुमार, संजय शर्मा, आरिफ, सतीश कुमार, राजेश कुमार, नौशाद, नुकुल वत्स, हरवीर सिंह, साकिब खांन, राजेन्द्र कुमार।
यह बोला महापौर-एसएसपी-पूर्व नगर स्वा. अधिकारी ने
महापौर हरिकांत अहलूवालिया से जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि मुझे इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ही इस संबंध मे बेहतर व विस्तार से जानकारी दी सकते हैं। नगर निगम के तेइस कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति मामले में कार्रवाई पर एसएसपी मेरठ डा. विपिन ताडा ने पूर्व में ही बताया था कि उन्हें नोटिस की अभी जानकारी नहीं मिली है। इस संबंध में वह मालूमात करेंगे। लेकिन 23 को इस मामले में हाईकोर्ट में जबाव दाखिल किया जाना है।
नगर निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने बताया कि इस मामले में शासन व मंडलायुक्त के स्तर से जांच की जा चुकी है। नगरायुक्त को कार्रवाई व सेलरी की रिकबरी करनी है जो नहीं की गयी। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। इसके बाद एसएसपी मेरठ व सीबीसीआईडी एसपी आगरा को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है।