आज है गणगौर व्रत, पूजा के बाद जरूर मांग लें माफी, उत्तर भारत में मनाया जा रहा है गणगौर का त्यौहार
नई दिल्ली। यदि आपको पति से प्यार है और उनकी लंबी उम्र व सलामती चाहती हैं तो गणगौर का व्रत पूजन जरूर करें लेकिन ब्रत व पूजन को लेकर कुछ हिदायतें भी हैं उनका भी पालन जरूर करें। मसलन कथा पढ़ें/सुनें, आरती करें और माफी मांगें। चैत्र शुक्ल तृतीया पर। यह मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों में मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसमें विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना करती हैं।
प्रेमिकाएं और जिनकी शादी होने वाली हैं
वो महिलाएं जो लिव इन में रह रही हैं या जिनकी शादी होने वाली हैं यानि मंगेतर हैं वो भी गणगौर का व्रत पूजन कर सकती हैं। जिस प्रकार से सुहागनें पूजा व व्रत रखती हैं वैसे ही वो भी व्रत व पूजन करें। चैत्र शुक्ल तृतीया 21 मार्च 2026 को सुबह ~02:30 AM से शुरू होकर रात ~11:56 PM तक है। पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 5-6 बजे के आसपास या दिन के शुभ समय में है। कई जगहों पर होली के बाद से 16-18 दिनों तक तैयारी चलती है, लेकिन मुख्य व्रत और पूजा आज है।
शिव पार्वती की पूजा का विधान
गणगौर के व्रत में शिव व पार्वती की पूजा का विधान है। महिलाएं ईसर (शिव) और गौरी (पार्वती) की मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं। भोग में फल, मिठाई, घेवर आदि लगाए जाते हैं। मध्य प्रदेश के देवास में अनोखी परंपरा: पत्नियां पतियों को हल्के से मारती हैं (प्यार का प्रतीक)। राजस्थान में जुलूस, गीत-नृत्य और सजावट के साथ उत्सव मनाया जाता है। आज कई जगहों पर आरती और कथा पाठ हो रहा है।
गणगौर की कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान शिव, माता पार्वती और नारद मुनि भ्रमण पर निकले। चैत्र शुक्ल तृतीया को वे एक गांव पहुंचे। वहां की महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर रही थीं। पार्वती ने देखा कि कुछ महिलाएं सादगी से पूजा कर रही हैं, तो उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया। एक गरीब ब्राह्मणी ने कठोर व्रत किया। शिव-पार्वती ने परीक्षा ली — कभी कच्ची पूजा (कच्ची गणगौर), कभी पक्की। भक्ति से प्रसन्न होकर पार्वती ने उसे अखंड सौभाग्य और धन दिया। कथा यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति और व्रत से सुहाग, सुख और समृद्धि मिलती है। पूजा के दौरान इस कथा का पाठ अवश्य करें — इससे मां गौरी प्रसन्न होती हैं और सुहाग की रक्षा होती है।
ऐसे करें पूजा
साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। सोलह श्रृंगार, फूल, चूड़ियां, मेहंदी आदि चढ़ाएं। घेवर, फल-मिठाई का भोग लगाएं। व्रत रखने वाली महिलाएं फलाहार करें, शाम को पूजा के बाद पारण करें।