अंजली ने की श्रीहरि की पूजा

शरद पूर्णिमा पर शहर के मंदिरों में श्री हरि की पूजा धारा न्यूज, संवाददाता मेरठ। शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर यानी आज मनाया जाएगा। मंदिरों में शरद पूर्णिमा उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी है। औघड़नाथ मंदिर और मनोहर नाथ मंदिर में खीर का भोग लगाया जाएगा। दुर्गाबाड़ी में रात को दुर्गा पूजन रखा गया है।दूध की खीर में घी और सफेद खांड मिला कर अर्ध रात्रि में ऐसे रखना चाहिए जिससे उसमें चंद्रमा की किरणें पड़ें। चंद्र देव के मध्याकाश में आते ही उनका पूजन करना चाहिए। दूसरे दिन सुबह खीर का सेवन करना चाहिए। सदर दुर्गा बाड़ी में रविवार को शाम 7.30 बजे लक्ष्मी पूजन होगा। मुकुंदी देवी धर्म शाला में भी देवी का पूजन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार  काले कपड़े पहनने से बचें। फल और जल का सेवन कर व्रत रखें और देवी लक्ष्मी का पूजन करें। इस रात माता महालक्ष्मी कमल आसन पर विराजमान होकर धरती पर आती हैं। इस दिन कई स्थानों पर लोग माता लक्ष्मी के नाम से व्रत करते हैं। उनसे अन्न धन की प्राप्ति की कामना करते हैं। वहीं देश के कई भागों में इस रात काली पूजा भी होती है। मान्यता है, कि माता लक्ष्मी इस रात लोगों के घरों पर घूमती हैं। देखती हैं कि किस व्यक्ति ने मेरी पूजा की है। माता जिस व्यक्ति से संतुष्ट होती है, उसे अपना आशीर्वाद भी देती है। रविवार को कार्तिक स्नान पूर्णिमा और भगवान वाल्मीकि जयंती भी होगी। ज्योतिष पंचांग के अनुसार, अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रविवार, 09 अक्टूबर 2022 को सुबह 03 बजकर 42 मिनट से आरंभ होगी और अगले दिन सोमवार, 10 अक्टूबर 2022 को सुबह 02 बजकर 26 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। कहते हैं कि इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी कारण इसे रास पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी व्रत जैसे नामों से भी जानते हैं। शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। शरद पूर्णिमा के दिन बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग, सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग, चंद्र और गुरु की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इसके अलावा बुध, शनि और गुरु तीनों के स्वराशि होने से भद्र, शश और हंस नामक पंचमहापुरुष योग बन रहे हैं। ऐसे में खरीदारी के लिए काफी शुभ है। वर्धमान के साथ धुव्र योग बन रहा है। इसके साथ उत्तराभाद्र और रेवती नक्षत्र बन रहा है। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भ्रमण पर निकलती हैं। इस पूर्णिमा को लक्ष्मी, इंद्र पूजा और कोजागिरी व्रत और कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती और महर्षि पाराशर ऋषि जयंती भी मनाते हैं। शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का खास दिन माना जाता है। यह भी कहते हैं कि माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से इसी दिन प्रकट हुई थी। लक्ष्मी की पूजा विधिवत तरीके से करने से सुख-समृद्धि, धन और वैभव की प्राप्ति होती है। रद पूर्णिमा के दिन फल, जल का सेवन कर व्रत कर सकते हैं। सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए। "शरद पूर्णिमा के पूजन में मां लक्ष्मी और भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन होता है। चौकी पर पीला और लाल कपड़ा बिछाकर श्रीहरि, लक्ष्मी को स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं। गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, सुपारी और दक्षिणा आदि अर्पित करें।"
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अंजली ने पति संग की श्रीहरि की पूजा, भाजपा छावनी मंडल महिला मोर्चा  मेरठ की अध्यक्ष अंजली गुप्ता ने अपनी परिचितों के अलावा पति व परिवार के संग शरद पूर्णिमा के मौके पर श्रीहरि की पूजा अर्चना की। इस पूजा अर्चना में सदर सब्जी मंडी स्थित एयरटेल कंपनी के भाई सूरज भी अंजली गुप्ता के साथ श्रीहरीकी पूजा में शामिल हुए। भक्तिभाव से पूजा की। भाजपा नेत्री ने घर पर पति व परिवार के अन्य सदस्यों संग श्री हरि की पूजाकी।

पूरे महानगर में  मंदिरों में शरद पूर्णिमा उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी है। औघड़नाथ मंदिर और मनोहर नाथ मंदिर में खीर का भोग लगाया जाएगा। दुर्गाबाड़ी में रात को दुर्गा पूजन रखा गया है।दूध की खीर में घी और सफेद खांड मिला कर अर्ध रात्रि में ऐसे रखना चाहिए जिससे उसमें चंद्रमा की किरणें पड़ें। चंद्र देव के मध्याकाश में आते ही उनका पूजन करना चाहिए। दूसरे दिन सुबह खीर का सेवन करना चाहिए। सदर दुर्गा बाड़ी में रविवार को शाम 7.30 बजे लक्ष्मी पूजन होगा। मुकुंदी देवी धर्म शाला में भी देवी का पूजन किया जाएगा। भाजपा नेत्री अंजली गुप्ता ने बताया कि उनका परिवार भी शास्त्रों में जो विधान बताया गया है उसके अनुसार ही पूजा अर्चना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शरद पूर्णिमा की यदि बात की जाए तो बताया गया है कि इसमें  फल और जल का सेवन कर व्रत रखें और देवी लक्ष्मी का पूजन करें। इस रात माता महालक्ष्मी कमल आसन पर विराजमान होकर धरती पर आती हैं। इस दिन कई स्थानों पर लोग माता लक्ष्मी के नाम से व्रत करते हैं। उनसे अन्न धन की प्राप्ति की कामना करते हैं। वहीं देश के कई भागों में इस रात काली पूजा भी होती है। माता लक्ष्मी इस रात लोगों के घरों पर घूमती हैं। देखती हैं कि किस व्यक्ति ने मेरी पूजा की है। माता जिस व्यक्ति से संतुष्ट होती है, उसे अपना आशीर्वाद भी देती है। रविवार को कार्तिक स्नान पूर्णिमा और भगवान वाल्मीकि जयंती भी होगी। ज्योतिष पंचांग के अनुसार, अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रविवार, 09 अक्टूबर 2022 को सुबह 03 बजकर 42 मिनट से आरंभ होगी और अगले दिन सोमवार, 10 अक्टूबर 2022 को सुबह 02 बजकर 26 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।

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