बाल श्रम पर जागरूकता कार्यक्रम

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बाल श्रम पर जागरूकता कार्यक्रम, बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर मेरठ में पर्यावरण एवं स्वच्छता क्लब द्वारा बाल श्रम सामाजिक समस्या एवं समाधान विषय पर ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्लब निदेशक आयुष गोयल पीयूष गोयल ने बताया भारत में प्रतिवर्ष 500000 से अधिक बच्चे बाल श्रम का शिकार होते हैं। बाल श्रम हमारे देश में एक गंभीर समस्या का रूप धारण कर चुकी है। बाल श्रम का मुख्य कारण अशिक्षा है। बाल श्रम को समाज से समाप्त करने के लिए बच्चों को शिक्षित करना होगा। मुख्य अतिथि डॉ दीप्ति कौशिक ने कहा बाल श्रम हमारे देश के विकास में बाधक है बाल श्रम के करण बाल अपराधियों का जन्म होता है बाल श्रम मुक्त समाज बनाने के लिए 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो से व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर नियुक्ति ना करें ,यह कानूनी अपराध है। बच्चे हमारे देश का भविष्य है उनके हाथ में कुदाल और फावड़ा नहीं किताब होनी चाहिए । बाल श्रमिकों के लिए विद्यालयों के साथ-साथ पुनर्वास केंद्रों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए । बाल श्रमिकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हम सबका कर्तव्य है । मंडप एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंघल ने सभी व्यापारियों से बाल मजदूरों को नियुक्ति ना देने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन प्रिंस अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में एस के शर्मा लक्ष्मी शर्मा शालिनी अग्रवाल उमरा आदि उपस्थित रहे। सामाजिक कार्यकर्ता विपुल सिंहल ने उन लोगों को नसीहत दी जो घरों में बाल श्रम कराते हैं। होटलों व ढाबों पर बाल श्रम करा रहेे हैं। ऐसे लोगों से विपुल सिंहल ने कहा कि छोटे बच्चों से बजाए घर, दफ्तर, होटल या ढावा तथा अन्य स्थानों पर श्रम कराने से बेहतर है कि इन्हें अपना बच्चा मानकर इनकी पढाई व स्वास्थ्य की ओर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक गंभीर अपराध है। उन्होंने यह भी मांग की पुलिस प्रशासन को संयुक्त अभियान चलाकर छापा मारना चाहिए। जहां भी बाल श्रम मिले वहां संबंधित आरोपी पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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