दिल के मरीज की बचायी जान

मेडिकल कालेज मेरठ के हृदयरोग विभाग में महाधमनी के संकुचन (कोआर्कटेशन आफ एओरटा) का पहली बार बीना चीरा लगाये बैलून डाइलेशन तथा स्टेंटिंग विधि द्वारा सफल ईलाज किया गया मेडिकल कालेज के मीडिया प्रभारी डा वी डी पाण्डेय ने बताया कि जनपद मेरठ निवासी 46 वर्षीय कुसुम एक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थीं। जिसमे हृदय से शरीर में रक्त ले जाने वाली महाधमनी (एओरटा) की सिकुड़न होती है। ऐसे में शरीर के निचले भाग जैसे पैरों और उदर में रक्तप्रवाह बहुत कम होता है। ऐसे मरीजों में रक्तचाप बहुत अधिक होने और दिल की दीवार मोटी होने के कारण सांस का फूलना आम बात है। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में coarctation of aorta( कोआर्कटेशन) कहते हैं। कुसुम ने मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग की ओ पी डी में डा शशांक पाण्डेय से संपर्क किया। उन्हें बीमारी और इलाज के बारे में समझाया गया। मेडिकल कॉलेज के अलावा मरीज ने एम्स, दिल्ली समेत कई प्राइवेट अस्पतालों में भी संपर्क किया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। डॉक्टर शशांक पाण्डेय सहायक आचार्य हृदय रोज विभाग ने बताया कि मरीज की बिमारी जटिल थी इसमें ओपन हार्ट बाई पास सर्जरी की आवश्यकता थी परंतु मरीज को हालत गंभीर थी ओपन हार्ट के लिए प्रतीक्षा करने का समय नहीं था। मरीज के तिमारदारों को बीमारी को बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा ठीक किये जाने के विषय में विस्तार से समझाया गया तीमारदारों ने स्वीकृति प्रदान की। डा शशांक पाण्डेय एवम डॉक्टर सी बी पाण्डेय तथा उनकी टीम ने सूझ बूझ के साथ मरीज के एक हाथ एवम एक पैर की कुल दो नसों से कैथेटर को मरीज के हृदय तक ले जा कर मेडिकल कालेज मेरठ में पहली बार बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा का बीना चीरा लगायेगा सफल ऑपरेशन किया। मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा आर सी गुप्ता ने कहा कि हृदय रोग विभाग मेडिकल कॉलेज मेरठ नित नए किर्तिमान स्थपित कर रहा है। हृदय रोग विभाग में समस्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। आम जनमानस इसका लाभ प्राप्त कर रहा है। प्रधानाचार्य ने कार्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ धीरज सोनी, डा शशांक पाण्डेय, डा सी बी पाण्डेय तथा उनकी पुरी टीम को सफल ऑपरेशन के लिए बधाई दी।
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दिल के मरीज की बचायी जान, एलएलआरएम  मेडिकल कालेज मेरठ के हृदयरोग विभाग में महाधमनी के संकुचन (कोआर्कटेशन आफ एओरटा) का पहली बार बीना चीरा लगाये बैलून डाइलेशन तथा स्टेंटिंग विधि द्वारा सफल ईलाज किया गया। मेडिकल कालेज के मीडिया प्रभारी डा वी डी पाण्डेय ने बताया कि जनपद मेरठ निवासी 46 वर्षीय कुसुम एक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थीं। जिसमे हृदय से शरीर में रक्त ले जाने वाली महाधमनी (एओरटा) की सिकुड़न होती है। ऐसे में शरीर के निचले भाग जैसे पैरों और उदर में रक्तप्रवाह बहुत कम होता है। ऐसे मरीजों में रक्तचाप बहुत अधिक होने और दिल की दीवार मोटी होने के कारण सांस का फूलना आम बात है। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में coarctation of aorta( कोआर्कटेशन) कहते हैं। कुसुम ने मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग की ओ पी डी में डा शशांक पाण्डेय से संपर्क किया। उन्हें बीमारी और इलाज के बारे में समझाया गया। मेडिकल कॉलेज के अलावा मरीज ने एम्स, दिल्ली समेत कई प्राइवेट अस्पतालों में भी संपर्क किया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। डॉक्टर शशांक पाण्डेय सहायक आचार्य हृदय रोज विभाग ने बताया कि मरीज की बिमारी जटिल थी इसमें ओपन हार्ट बाई पास सर्जरी की आवश्यकता थी परंतु मरीज को हालत गंभीर थी ओपन हार्ट के लिए प्रतीक्षा करने का समय नहीं था। मरीज के तिमारदारों को बीमारी को बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा ठीक किये जाने के विषय में विस्तार से समझाया गया तीमारदारों ने स्वीकृति प्रदान की। डा शशांक पाण्डेय एवम डॉक्टर सी बी पाण्डेय तथा उनकी टीम ने सूझ बूझ के साथ मरीज के एक हाथ एवम एक पैर की कुल दो नसों से कैथेटर को मरीज के हृदय तक ले जा कर मेडिकल कालेज मेरठ में पहली बार बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा का बीना चीरा लगायेगा सफल ऑपरेशन किया। मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा आर सी गुप्ता ने कहा कि हृदय रोग विभाग मेडिकल कॉलेज मेरठ नित नए किर्तिमान स्थपित कर रहा है। हृदय रोग विभाग में समस्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। आम जनमानस इसका लाभ प्राप्त कर रहा है। प्रधानाचार्य ने कार्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ धीरज सोनी, डा शशांक पाण्डेय, डा सी बी पाण्डेय तथा उनकी पुरी टीम को सफल ऑपरेशन के लिए बधाई दी।

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