निगम में एक और घोटाला

निगम को 33 करोड़ का फटका
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निगम में एक और घोटाला, मेरठ नगर निगम में अब एक और नए प्रकार का घोटाला सामने आया है। हालांकि वक्त रहते नगरायुक्त ने इसको पकड़ लिया, लेकिन जब तक यह पकड़ा गया तब तक काफी देर हो चुकी थी। यह पूरा मामला आउटसोर्स कर्मचारी धर्मवीर सिंह से जुड़ा है। जिनकी नियुक्ति बतौर ड्राइवर नगर निगम में हुई थी, लेकिन कर रहे थे लिपिक का काम। बताया जाता है कि इन्हें धूल भरी सड़कों पर गाड़ी चलाना पसंद नहीं। इसलिए घालमेल कर लिपिक की कुर्सी कब्जा ली। लेकिन यह सब इन पर अब भारी पड़ गया है। हुआ यूं कि  लिपिक का कार्य करने हेतु नगर आयुक्त से गुमराह करके आदेश कराने गए थे, लेकिन मामले के संज्ञान में आने पर नगर आयुक्त द्वारा आदेश को निरस्त कर दिया गया। साथ ही आदेशित किया गया कि उक्त कर्मचारी पूर्व की भांति बतौर ड्राइवर ही डयूटी करेंगे। बताया गया है कि इसी मामले से जुड़ी एक  शिकायत पर जिलाधिकारी को नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा स्पष्ट उत्तर भी  भेजा गया है कि इनकी नियुक्ति जिस तिथि को हुई थी उस से आज तक इनके द्वारा कोई गाड़ी नहीं चलाई गई है।  इनके द्वारा जब से गाड़ी चलाने प्रारंभ की गई थी उसकी तिथि नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पत्र में अंकित है।  इनके द्वारा मात्र तीन चार महीने गाड़ी चलाई गई उसके बाद इनके द्वारा कभी भी गाड़ी नहीं चलाई गई इनकी नियुक्ति ड्राइवर आउटसोर्सिंग के पद पर हैं। इनके द्वारा अब तक बिना कार्य के बिना गाड़ी चलाएं अधिकारियों को गुमराह करके 3300000 का भुगतान नगर निगम से प्राप्त कर चुके हैं जो अपने आप में महा घोटाला है। उल्लेखनीय है कि  गाड़ी चलाने वाले हर ड्राइवर के साइन स्टॉक बुक में और पर्ची के पीछे होते हैं। आरोप है कि इस उक्त आउटसोर्स कर्मचारी धर्मवीर ने कभी कोई गाड़ी नहीं चलाई गई जिसकी पुष्टि स्टॉक बुक से भी की जा सकती है। स्टॉक में इनके कोई हस्ताक्षर नहीं है जिससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा बिना कार्य किए नगर निगम से वेतन भुगतान लिया जा रहा है जो महा घोटाला है। अब इनको दी गयी सेलरी की रकम की रिकबरी की भी चर्चा सुनने में आ रही है। इस संबंध में नगरायुक्त के रूख का इंतजार किया जा रहा है। यह भी जानकारी मिली है कि नगर निगम मेरठ में इस प्रकार के घोटाले की शिकायत एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा प्रमुख सचिव नगर विकास को भी भेजी गयी है।

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