मेरठ टू दिल्ली रैपिड का इलैक्ट्रिफिकेशन शुरू

मेरठ टू दिल्ली रैपिड का इलैक्ट्रिफिकेशन शुरू
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मेरठ टू दिल्ली रैपिड का इलैक्ट्रिफिकेशन शुरू,  भारत की प्रथम रीजनल रेल के 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के लिए सबसे पहले ओवर हेड इक्विपमेंट (ओएचई) के ऊर्जाकरण का कार्य आज कर लिया गया है। इसके लिए दुहाई डिपो में बने इंस्पेक्शन बे लाइन (आईबीएल) पर पहले ओवर हेड इक्विपमेंट (ओएचई) सेक्शन को 25000 वोल्ट पर चार्ज किया गया। यह RRTS प्रोजेक्ट क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम है आरआरटीएस ट्रेनों की डिजाइन गति 180 किमी/घंटा है। इस कॉरिडोर पर स्थापित ओएचई को ऐसी उच्च गति एवं उच्च आवृत्ति वाली ट्रेनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट रूप से डिज़ाइन किया गया है। इन सक्रिय आईबीएल लाइनों में 25000 वोल्ट की विद्युत आपूर्ति इसे एक उच्च ऊर्जा जोखिम क्षेत्र बना देती है। एनसीआरटीसी ने डिपो में काम करने वाले और उसके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं।  चार्ज लाइनों के पास आने पर संभावित जोखिमों के बारे में लोगों को सूचित और जागरूक करने के लिए अलग-अलग जगहों पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। दुहाई डिपो के आस-पास कई गांव हैं। वहां नियमित रूप से घोषणाएँ की जा रही हैं। मेन लाइन पर ट्रेनों के ट्रायल से पहले इन आईबीएल पर आरआरटीएस ट्रेनों का परीक्षण और कमीशन किया जाएगा। इंस्पेक्शन बे लाइनों (आईबीएल) का उपयोग रोलिंग स्टॉक के निरीक्षण और आरआरटीएस ट्रेनों के आवश्यक परीक्षण के लिए किया जाता है। दुहाई डिपो का आईबीएल भी अपने आप में ख़ास है, क्योंकि यहां विशेष प्रकार के रिट्रैक्टेबल ओवर हेड इक्विपमेंट (ओएचई) लगाए गए हैं। डिपो में ट्रेनों की छत के निरीक्षण के लिए यह रिट्रैक्टेबल ओएचई बहुत उपयोगी हैं क्योंकि रखरखाव के विभिन्न कार्यों के लिए ट्रेन की छत तक निर्बाध एवं सुगम पहुंच की सुविधा प्राप्त करने के लिए इस पूरे ओएचई सिस्टम को एक तरफ स्थानांतरित किया जा सकता है। आईबीएल के ऊर्जाकरण से ट्रेन की डायनेमिक टेस्टिंग में तेजी आएगी और मेन लाइन टेस्टिंग के लिए इसकी तैयारी सुनिश्चित होगी। दुहाई डिपो में स्टेबलिंग लाइन्स, टेस्ट ट्रैक, वर्कशॉप, ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट हैं।

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