कांवड़ शिविरों पर महंगाई

kabir Sharma
3 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

हरिद्वार। महंगाई की मार के चलते इस साल कांवड़ शिविरों का स्वरूप बदल गया है। बीते सालों में जिन शिविरों में चौबीस घंटे कांवड़ियों के लिए भोजन आदि का इंतजाम रहता था, इस साल वो शिविर कांवड़ियों के विश्राम में तब्दील हो गए हैं इसके अलावा कुछ शिविरों ने जो रूड़की रोड पर लगा करते थे वो या तो लगे ही नहीं हैं, या फिर ऐसे शिविर केवल चाय व कांवड़ियों के विश्राम तक सीमित होकर रह गए हैं। रूड़की रोड पर बड़ी संख्या में ऐसे शिविर लगा करते थे, जहां कांवड़ियों के लिए चौबीस भोजन की व्यवस्था हुआ करती थी। भोजन भी अलग-अलग प्रकार का हुआ करता था। सुबह के वक्त कचौरी पूरी और आलू व कद्दू की सब्जी, दोपहर में कढ़ी चावल और शाम के वक्त तंदूर की रोटी। रूड़की रोड पर हरि अपार्टमेंट के बाहर ऐसे शिविर लगा करते थे, लेकिन इस साल यहां शिविर लगाए ही नहीं गए है। यहां किसी भी प्रकार का शिविर इस बार नहीं हैं। कुछ लोगों ने केवल स्वास्थ्य शिविर मतलब मरहम पट्टी और पानी की सेवा का लगाया है। इससे आगे सोफीपुर के बाहर जहां चर्च है,वहां भी कांवड़ियों के लिए कचौरी व सब्जी की सेवा रहती थी। इस साल यहां केवल ठहरने व चाय की सेवा की जा रही है। इसी मार्ग पर एमईएस के समीप शहर के कई ढनाढय लोग मिलकर कांवड़ियों के लिए भोजन का शिविर लगाया करते थे, लेकिन वो शिविर भी इस साल नहीं लगा है। हाईव पर अंसल कोर्ट यार्ड के सामने भी कई शिविर भोजना के लगते थे, लेकिन इस बार केवल शिव दुर्गा मंदिर समिति ने ही भोजना सेवा का शिवर लगाया है। जबकि इस शिविर के आसपास भोजन सेवा के कई शिविर लगा करते थे। महानगर में कई अन्य स्थानों पर भी इस साल कांवड़ियों के लिए भोजना सेवा के शिविरों की संख्या में कमी देखी नजर आती है। नाम ना छापे जाने की शर्त पर एमईएस बिजलीघर के समीप शिविर लगाने वाले एक परिवार के मुखिया ने बताया कि महंगाई के चलते इस बार शिविर की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इसके अलावा जो लोग सहयोग करते थे, उनकी भी संख्या इस बार घट गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि शहर में भोजना सेवा के शिविरों की संख्या कम होने की यही वजह है। एक तो महंगाई की मार दूसरे प्रशासन की खानापूर्ति अब बहत ज्यादा हो गई है। यदि महंगाई की यही स्थिति रही तो अगले साल यह संख्या और भी ज्यादा तेजी से घटेगी।

उनका यह भी कहना है कियदि महंगाई के चलते यूं ही सेवा शिविरों की संख्या घटती रही तो इसका प्रभाव कांवड़ उठाने वालों की संख्या पर भी पड़गा। कांवड़ियां बड़ी संख्या में इन सेवा शिविरों पर आश्रित रहते है।

WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *