मेरठ। काली पलटन पर होने वाले जलाभिषेक के दौरान खुद अफसर भी थे परेशान कि कहां कहां करेंगे जानलेवा उमस व गर्मी में विश्राम और भोजन। अफसरों से ज्यादा पुलिस कर्मी जो जानते हैं कि कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष जितनी शानदार व्यवस्था करते हैं, वैसी किसी के भी बस की बात नहीं। केवल पुलिस वाले ही नहीं कैंट बोर्ड का स्टाफ, स्वास्थ्य कर्मी और जितने भी लोगों की काली पलटन उस तीन चार दिन ड्यूटी लगती है सभी परेशान थे कि कहां करेंगे भोजना क्योंकि भाजपा के कुछ नेताओं सभी नेता नहीं के प्रेशर में आकर भाजपा नेता दिनेश गोलय को कार्यक्रम मतलब कैंप की अनुमति नहीं दी गयी है। इसके पीछे मुख्य वजह बिल्लेश्वर महादेव मंदिर की कानूनी लड़ाई है, ऐसा करने वालों को यह सोचना चाहिए था कि काली पलटन पर बीते कई सालों से दिनेश गोयल का परिवार अपने बूते वो किसी से कोई चंदा नहीं लेते हैं, प्रशासन कैंप लगा रहा है। यहां कैंप में विश्राम के अलावा शानदार भोजन की भी व्यस्था की जाती है। दवाब के चलते उन्होंने कैंप की अनुमति से इंकार तो कर दिया लेकिन जब मुसीबत का पता चला तो भूल सुधार करते हुए आनन-फानन में अनुमति दे दी गयी। इसको दिनेश गाेयल की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। यहां यह कैंप हर साल लगता है। इसका उद्घाटन करना भाजपा के नेता फ्रक समझते रहे हैं और इसका उद्घाटन करते आते रहे हैं, न जाने इस साल उन्हें क्या हो गया जो प्रशासन पर प्रेशर बनाकर अनुमति पहले ही रद्द करा दी, लेकिन अनुमति देकर भूल सुधार कर लिया। जो भाजपा नेता यहां उद्घाटन को आते रहे हैं उनकी गवाही ये चित्र भी दे रहे हैं।