एक अकेला सब पर भारी

kabir Sharma
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मेरठ। एक अकेला जिसको सब घेरने में लगे थे और पहले लगा कि सभी ने मिलकर घेर भी लिया,लेकिन जब उसने अंगड़ाई ली तो अपने मंसूबों को लेकर खुश होने वाले चारों खाने चित्त हो गए। कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश गोयल के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। इस प्रकार की विकट परिस्थितियों का सामने उन्होंन कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष रहते अनेक बार किया, लेकिन हर उनके विपक्षी चारों खाने चित्त हुए। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। दिनेश गोयल का परिवार हर साल बगैर किसी के रत्ती भर सहयोग के अनेक सालों से कांवड़ यात्रा व शिवरात्री के मौके पर पुलिस प्रशासन कैंप लगाता रहा है। पुलिस प्रशासन कैंप तो नाम भर का होता है, इस मौके पर दिनेश गोयल का परिवार काली पलटन पर आने वाले तमाम बड़े अफसरों व कैंट बोर्ड, पुलिस कर्मियों, खासकर उन महिला पुलिस कर्मियों व अन्य विभागाें का जितना भी स्टाफ ड्यूटी पर लगाया जाता, उनके लिए चाय व नाश्ता के अलावा चौबीस घंटे भोजन की व्यवस्था की जाती। भले ही रात को कोई दो बजे आए या तडके पांच बजे आए, उसको गर्म भाेजन मिलता। शायद ही हरिद्वार से मेरठ तक ऐसी व्यवस्था की गई होगी जैसी दिनेश गोयल की ओर से काली पलटन पर लगा जाने वाले पुलिस प्रशासन के कैंप में की जाती है। इस कैंट का उद्घाटन करने के लिए भाजपा के तमाम बड़े नेता हर साल आया करते हैं। इसको लेकर उनमें खासा उत्साह रहता है। वहीं दूसरी ओर उनका पूरा परिवार इस कैंप में चौबीस घंटे सेवा में रहता है। खुद दिनेश गोयल व उनके पुत्र गौरव गोयल व गौरव गोयल के पुत्र भी इस कैंप में बड़े मनोयोग से आने वालों की सेवा करते हैं। लेकिन दिनेश गोयल के कुछ धुर विरोधियों को यह रास नहीं आया और उन्होंने अपने पद व प्रतिष्ठा का दुरूपयोग करते हुए पुलिस प्रशासन के कैंप के लिए सालों साल मिलने वाली अनुमति को इस बार रोक दिया। दिनेश गोयल व उनके पुत्र गौरव गोयल खांटी भाजपाई हैं और उनके प्रतिष्ठा पर प्रहार करने वाले भी भाजपाई हैं। संगठन के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। वहीं दूसरी ओर अफसरों ने अनुमति से इंकार कर दिया। इससे दिनेश गोयल से ज्यादा वो निराश हुए, जिनके लिए करीब चार दिन तक यह कैंप ही एक मात्र सहारा होता है। जैसे-जैसे शिवरात्री का पर्व करीब आता गया, अफसर भी परेशान हो उठे, क्योंकि कोई दूसरा इतनी कूबत नहीं रखता जितनी सेवा दिनेश का परिवार बगैर किसी के रत्तीभर सहयोग के इस कैंप के आयोजन में रखता है। वहीं दूसरी ओर दिनेश गोयल ने जब देखा कि सभी लोग परेशान हैं और उनके विरोधी इस पर खुश हो रही हैं। तो उन्होंने अपने प्रभाव व पहुंच का इस्तेमाल करते हुए विराेधियों को चित्त कर डाला और जिन अफसरों ने इंकार कर दिया, उन्होंने ही कैंप लगाने का आग्रह किया। कैंप की सूचना मिलते ही सबसे ज्यादा राहत की सांस उन्होंने ली जिनके लिए यह कैंप ही चार दिन का सहारा होता है। वहीं दिनेश गोयल परिवार ने बेहद कम समय में तमाम तैयारी कर डाली और पहले से भी बेहतर आयोजन इस साल किया। यह विरोधियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था।

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