मेरठ के मदरसों में 3 करोड रुपए छात्रवृत्ति गवन के सभी 10 आरोपियों की जमानत, नहीं पेश कर पाए कोई साक्ष्य
इलाहबाद। तीन करोड़ के जिस मदरसा घोटाले को लेकर मेरठ से लेकर लखनऊ तक हो-हल्ला मचा हुआ था, उसको लेकर जांच ऐजेन्सियां कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं पेश कर पाई, जिसके चलते हाइकोर्ट सभी दस आरोपियों को जमानत दे दी है। मिली जानकारी के अनुसार इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 3 करोड रुपए छात्रवृति गबन के मामले में आरोपित उपप्रधानाचार्य फुरकान व प्रबंधक असलम मदरशा मोहम्मदिया प्राइमरी स्कूल,ग्राम जिसोरी जिन पर 3,37,000 गबन के आरोप , कोषाध्यछ अज़रा मदरशा न्यू डी एम पब्लिक स्कूल जिनपर 10,95,650 रुपये के गबन का आरोप उपाध्यक्ष शमशाद मदरसा उस्मानिया अरबिया उलउलूम जिनपर 2,48,000 रुपये गबन के आरोप ,इसी प्रकार अन्य आरोपी सलीमुद्दीन, समर जहां ,सफीकुल हसन, मोहम्मद कासिम ,सैयद जफर मेहंदी की जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने याचीगण की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुनकर दिया है । याचीगण के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि मेरठ जिले में वर्ष 2010-11 में छात्रवृत्ति वितरण में मदरसा में पढ़ रहे छात्रों के 3 करोड रुपए छात्रवृति अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम, वरिष्ठ सहायक संजय त्यागी ने 99 मदरशा में छात्रवृति का वितरण मदरशो के खाते में भेज कर भौतिक सत्यापन करा कर तत्कालीन सी डी ओ के द्वारा पारित आदेश पर अधिकारियों की मौजूदगी में नगद वितरण कराया था ।आरोप है कि अधिकारी ,वरिष्ठ सहायक ने सभी मदरसा के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व अध्यापक से मिलीभगत कर 3 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति हड़प कर लिया जिस पर 99 एफ आई आर मेरठ जिले में दर्ज कराई गई थी।
याचियों की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने कहा कि याचीगढ़ निर्दोष है। सभी लोगों ने तत्कालीन सीडीओ के आदेश 18 मई 2011 पर चयनित अधिकारियों के समक्ष पूरे जिले में आई 3 करोड रुपए की छात्रवृत्ति का वितरण बच्चों का भौतिक सत्यापन कर उनको नगद वितरण किया गया था। छात्रवृति रजिस्टर में बच्चों ने अपने लगे हुए फोटो के सामने हस्ताक्षर कर छात्रवृति प्राप्त की थी और तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शपथ पत्र देकर छात्रवृत्ति पाए जाने की पुष्टि की थी । याचियों की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने कहा आज तक किसी मदरसे की किसी छात्र-छात्राओं/माता पिता ने कोई भी शिकायत छात्रवृत्ति न मिलने की नहीं की है। सरकार की ओर से दाखिल जवाब में किसी भी गबन का आरोप साबित नहीं हो पाया है विवेचना अधिकारी ने बिना बच्चों व तत्कालीन सीडीओ , छात्रवृति वितरण में मौजूद अधिकारियों का बयान लिए याचीगढ़ को झूठे मुकदमे में फंसा कर चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दाखिल कर दी ।अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका की विरोध कर बताया कि छात्रवृत्ति बच्चों के खातों में ना भेज कर मैनेजमेंट के खाते में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व उसके बाबू की मिली भगत से भेज कर मदरसा संचालकों प्रधानाचार्य अध्यापकों से मिली भगत कर छात्रवृत्ति 3 करोड रुपए छात्रवृत्ति का हड़प लिया गया जबकि भारत सरकार की गॉइड लाइन के अनुसार बच्चो के खातों में सीधे छात्रवृति भेजी जानी थी ,नियम का उल्लंघन हुआ है । याची अधिवक्ता ने बताया कि वर्ष 2010-11 में बच्चों के खातों में सीधे छात्रवृत्ति भेजने का कोई भी आदेश सरकार के द्वारा स्पष्ठ रूप से नहीं पारित किया गया था। गाजियाबाद, सहारनपुर ,हमीरपुर में आरटीआई रिपोर्ट के आधार पर यह पता चलता है कि प्रदेश के अन्य जिलों के मदरशा में आई छात्रवृत्ति को नगद वितरण कर छात्रवृति रजिस्टर पर फोटो लगाते हुए हस्ताक्षर कराया गया था और नगद वितरण के दौरान मौजूद अधिकारी ने भी रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर किया था। याचीगढ़ का इन मुकदमों से पहले कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं रहा है याचीगढ़ पिछले 5 से 7 महीना से जेल में बंद है जिस पर हाईकोर्ट ने याची अधिवक्ता को सुनकर शर्तों के साथ याचीगणों फुरकान, शमशाद, अज़रा ,असलम ,सलीमुद्दीन, समर जहां ,सफीकुल हसन, मोहम्मद कासिम ,सैयद जफर मेहंदीकी जमानत याचिका मंजूर कर ली।