शर्म है कि उन्हें आती नहीं

kabir Sharma
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आबूनाले पर पीएल शर्मा के दुकानदारों के कब्जों पर चुप रहे अफसर व जन प्रतिनधि

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मेरठ। आबूनाले का पानी आदर्शनगर के घरों में भरने को लेकर गुरूवार को खूब होहल्ला मचा। वहां के वाशिंदों ने शासन को अलग-अलग कई लैटर भेजे, जिसमें घरों में आबूनाले का पानी भरने की वजह करीब दो साल के भीतर नाले पर कराए गए कब्जे को बताया। साथ ही यह भी बताया कि राजनीतिक प्रेशर के चलते इन कब्जों पर संबंधित विभाग के यानि नगर निगम के अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि यह दुर्दशा तो तब है जब यह इलाका महापौर के गृह क्षेत्र में आता है।
पीएल शर्मा रोड की दुकानों की भौगोलिक स्थिति की यदि बात की जाए तो जिन दुकानों की रजिस्ट्री करायी गयी है, उसमें लंबाई 15-20 फुट की करायी जाती है,जबकि मौके पर जो दुकान सौदा होता है सूत्रों की माने तो उसकी लंबाई करीब चालिस से पचास फुट की होती है। दरअसल यह खेल आबूनाले पर किए गए अवैध कब्जे की वजह से संभव हो सका है। पीएल शर्मा रोड के सभी दुकानदारों ने आबूनाले की ओर पीछे दुकानें बढ़ा ली हैं, और यह ऊंचाई इतनी ऊपर तक कर ली है कि नाले का पानी कूद कर उनकी दुकानें की सीमा तक ना पहुंच सके। जब पीएल शर्मा रोड पर दुकानों के पीछे की ओर जहां आबूनाला बहता है कब्जें के चलते नाले की चौड़ाई कम हो जाएगी तो एक दिन पहले हुई बारिश में नाले का पानी निश्चित रूप से सड़क बह कर आदर्श नगर के मकानों में जा घुसेगा। जिसकों लेकर शिकायत भेजी गयी है।

चंद घंटों की बारिश में आदर्श नगर समेत पूरे महानगर का जो हाल हुआ है, उससे यह तो साफ हो गया कि नगरायुक्त और नगर निगम ने कोई काम नहीं किया। मसला यह नहीं कि कौन अफसर कब आया और किस के कार्यकाल में कब्जे हुए, लेकिन यह तय है कि अफसरों ने काम नहीं किया जब अफसर अपने काम से गाफिल रहे तो फिर स्टाफ के काम करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। नगर निगम के अफसर, महापौर व पार्षदों के लिए इससे ज्यादा शर्मसार करने वाली दूसरी बात हो ही नहीं सकती कि कमिश्नर और डीएम को घुटनो-घुटनों सड़क पर भरे पानी में उतरना पड़ा, यह हाल तो बुढानागेट एरिया की है। जरा अंदाजा लगाइये शहर के पुरानी आबादी वाले लिसाड़ी रोड और तारापुरी व उससे सटे इलाकों की। जहां निगम व मेडा की कारगुजारी के चलते अवैध मकान गड्डों में बना दिए गए। वहां बारिश में क्या हाल हुआ होगा। बेहतर होता कि कोई वहां भी कमिश्नर और डीएम को बुला लेता, ताकि अधिकारियों और भूमाफियाओं की कारगुजारी का पता चल सकता। इन इलाकों में लोग किस नरक में रहने को मजबूर हैं। चंद घंटों की बारिश ने शहर का यह हाल कर दिया, अंदाजा लगाए यदि यह बरिश दो दिन ऐसे ही बरस जाती तो क्या होता। बड़े जनप्रतिनिधियों को समारोह में जाने और फोटो खिचवाने से ही फुर्सत नहीं मिलती, वार्ड के पार्षदों की यदि बात करें तो उनका रवैया केवल ठेकेदारों से उगाही और निगम से कमिशन उगाही तक सीमित है। कमिशनर और डीएम का घुटनों-घुटनों पानी में उतरा निगम अफसरों समेत सभी के लिए शर्म की बात है।

इस मुद्दे को लेकर आईटीआई एक्टिस्ट संदीप पहल ने सबसे पहले पहल की, उन्होंने इस पूरे मामले को उजाकर किया। उसके बाद ही दूसरे ने इस ओर पहल कि लेकिन संदीप पहल की शुरूआत के बाद भी महापौर, नगरायुक्त व पार्षदों की नींद टूटती नजर नहीं आ रही हैद्।

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