इलाहाबाद। हाईकोर्ट की फटकार के बाद खाद्यान विभाग व प्रशासनके तमाम अफसर बैकफुट पर आ गए। इतना ही नहीं जिस कर्मचारी की बात तमाम धरने व पैरवी के बाद भी नहीं सुनी जा रही थी, उसको आनन-फानन में संयुक्त कमिश्नर कार्यालय उसकी कुर्सी सौंप दी गई।लेकिन ये आशीष के लिए इतना आसान नहीं था, उन्होंने इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी तब कहीं जाकर यह मुमकिन हो सका। आशीष वो हैं जो औरया से ट्रासफर कर मेरठ भेजे गए है। और एक अदना से अवैध रूप से काविज ऊर्दू अनुवादक उनकी जिदंगी जहनुम बनाने पर उतारू है। दरअसल इस मामले में हाईकोर्ट ने बेहद कठोर शब्दों में अफसरों को लेकर टिप्पणी की थी। यह ऊर्दू अनुवाद उस्मान अली वो शख्स है, जिसको तत्कालीन डीएम कामिनी रत्न चौहान हटाने के आदेश कर गई थी, लेकिल संयुक्त कमिश्नर उनके भी आदेशों पर कुण्डली मारे रहे। पूर्व में तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने इस मामले में एफआई दर्ज करा गए थे। लेकिन आरोप है तत्कालीन संयुक्त आयुक्त खाद्य सत्य देव सिंह ने उसका बचाने का काम किया। आरोप है कि उनकी शह पर ही उस्मान ने आशीष का हक मारने का काम किया। उन्हें इसके लिए धरने प्रदर्शन तक करने पड़े लेकिन अफसरों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इतना ही नहीं 13 जनवरी 2019 को आशीष को सस्पेंड कर दिया गया। फजीहत के बाद 31 दिसंबर को उन्हें बहाल कर दिया गया। इसके बाद 30 जनवरी 2020 को गाजियाबाद डीएम कार्यालय से संबंद्ध कर दिया गया। 23 जनवरी 2022 को आदेश थमा दिया गया कि वह हिन्दी अंग्रेजी की टाइप सीखेंगे। इतना ही आरोप की ऊर्दू अनुवाद की नौकरी बचाने के लिए उनकी बर्खास्तगी की फाइल चलायी गयी। जब अति हो गयी तो वह हाईकोर्ट की शरण में गए और उक्त सारे घटनाक्रम की जानकारी हाईकोर्ट को दी। हाईकोर्ट को यह भी बताया कि उनकी पद स्थापना बतौर लिपिक के तौर पर की गयी है। केवल और केवल उस्मान को बचाने के लिए उक्त सारी कार्य किए गए। जो कुछ आशीष के साथ किया गया, उस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मेरठ के प्रशासनिक व खाद्य अधिकारियों ना केवल कठोर टिप्पणी की बल्कि यहां तक आदेश दिए कि आशीष को तत्काल उनके मूल पद पर ज्वाइनिंग कराई जाए। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीएम कार्यालय ने आनन-फानन ने आदेश जारी कर संयुक्त कार्यालय में उनकी ज्वाइनिंग करा दी, लेकिन ज्वाइनिंग के बाद भी आशीष की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
डीएम के आदेश पर मनमानी
हाईकोर्ट की खाद्य अफसरों को फटकार और मेरठ प्रशासन को कार्रवाई के आदेश के जिलाधिकारी ने बाकायदा आदेश जारी कर उस्मान को डीएसओ ऑफिस में भेजे जाने के आदेश दिए थे, लेकिन डीएम के आदेशों पर संबंधित अधिकारी भारी पड़ रही हैं। इतना ही नहीं वह होईकोर्ट से स्टे लेते तक पहुंच गई, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिल सकीं। ऐसा क्या है जो उस्मान सभी की नाक का बाल बना हुआ है। उसको डीएसओ ऑफिस भेजे जाने के डीएम के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है।