पति को राहत पत्नी की आफत

kabir Sharma
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पत्नी को भरण पोषण न देने पर वसूली व गिरफ्तारी का आदेश रद्द—पति को मिली अब बड़ी राहत

इलाहाबाद/औरया। वैवाहिक विवाद में पत्नी अज़रा बेगम निवासी सुभाष नगर कस्बा थाना सौरिख जनपद कन्नौज ने अपने पति मसरूफ अली निवासी नवाबगंज कानपुर नगर के विरुद्ध भरण पोषण भत्ता दिए जाने हेतु प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कन्नौज में वाद दाखिल किया था ।जिसमें परिवार न्यायालय ने याची मसरूफ अली को दस हजार पत्नी को बतौर भरण पोषण व अपने 2 बच्चों को दो -दो हजार रुपये प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के दिन से दिए जाने का आदेश पारित किया था । याची मसरूफ अली की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी को बताया कि पत्नी ने झूठा शपथ पत्र देकर परिवार न्यायालय को गुमराह कर यह आदेश पारित किया है पत्नी ने अपने को घरेलू महिला जिसकी आमदनी का कोई श्रोत नही कहकर आदेश पारित करा लिया जो की सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दी गई गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है।भरण पोषण भत्ता दिए जाने के आदेश के विरुद्ध याची ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर रखा है जिसमें विपक्षी को नोटिस भी जारी हुई है लेकिन आज तक उसमें कोई जवाब दाखिल नहीं किया जो विचाराधीन है। इसी दौरान पत्नी अजरा बेगम ने वसूली प्रक्रिया हेतु वाद दाखिल किया जिस पर परिवार न्यायालय ने भरण पोषण की धनराशि 7,06,000 (सात लाख)की वसूली हेतु वसूली व गिरफ्तारी के आदेश एस. पी ,कन्नौज को जारी कर दिया।गिरफ्तारी व वसूली के आदेश को याची ने चुनौती दी है ।

याची अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के केस रजनीश बनाम नेहा में पारित आदेश में दी गई गाइडलाइंस के विरुद्ध परिवार न्यायालय ने पत्नी को भत्ता न दिए जाने पर गिरफ्तारी का आदेश किया है ।सिविल प्रक्रिया संहिता की प्रक्रिया को न पालन करते हुए गिरफ्तारी का आदेश पारित किया है। जो न्याय संगत नहीं है ।न्यायालय ने सिविल प्रक्रिया के तहत रिकवरी की कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए गिरफ्तारी व रिकवरी का आदेश निरस्त कर दिया। पत्नी वर्तमान समय मे एफ. एच. मेडिकल कालेज ,टूंडला (फिरोजाबाद) में सरकारी सेवा में कार्यरत है ,के झूठे बयान दिए जाने पर याची ने 340 सीआरपीसी की प्रार्थना पत्र दिया जिसमें बताया कि पत्नी सरकारी नौकरी में है जिसको बिना निस्तारित किये परिवार न्यायालय ने विपक्षी पत्नी के भत्ते को दिए जाने का आदेश पारित किया है। जिस पर माननीय न्यायालय ने रिकवरी व गिरफ्तारी के आदेश को रद्द कर दिया।

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