अंधेरे में हाईवे बेखबर NHAI

kabir Sharma
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हादसों में अब तक कई मौतों के बाद भी नींद में हैं NHAI के अफसर

मेरठ। वाया मेरठ दिल्ली-देहरादून हाइवे के रोहटा फ्लाई ओवर और कंकरखेड़ा से आगे जटौली फ्लाई ओवर से मोदीपुरम फ्लाई ओवर तक धुप्प अंधेरे में डूबा हुआ है। यह पहली बार नहीं है, इन दोनों ही जगह कांवड़ यात्रा के दौरान भी लाइट नहीं थी। वो तो शुक्र था कि जो वाहन कांवड़ यात्रा में शामिल थे, उन लाइट की समुचित व्यवस्था थी, वर्ना यदि लाइट की समुचित व्यवस्था उन पर ना की गई होती तो निश्चित रूप से कांवड़ यात्रा के दौरान भी हादसे होते। कांवड़ यात्रा संपन्न हो चुकी है, उम्मीद की जा रही थी कि शायद अब एनएचएआई अफसरों की नींद टूटेगी, लेकिन रविवार और सोमवार की रात को भी रोहटा फ्लाई ओवर के ऊपर व जटौली फ्लाई ओवर से मोदीपुरम तक के बीच अंधेरा पसारा हुआ था। देर रात इस हाइवे भारी वाहनों के अलावा बड़ी संख्या बाइक व स्कूटी तथा कुछ साइकिल सवारों की भी होती है। जो भारी वाहन व दूसरी गाड़िया यहां से गुजरती हैं, उनकी स्पीड इतनी ज्यादा होती है कि अंधेरे में कई बार सामने चल रहा बाइक व स्कूटी चालक नजर भी नहीं आता है। ऐसे में अंधेरे की वजह से हादसे की आशंका रात में ज्यादा रहती है। पहले भी इसकी वजह से कई हादसे यहां हो चुके हैं। बीते साल सर्दी में तेज रफ्तार गाड़ी एक युवक जो अपने दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट से बाहर खड़ा था, उसको उड़ा गयी थी, मौके पर ही उसकी मौत हो गयी थी। अंधेरे की वजह से ही पिछले साल दिल्ली निवासी एक परिवार जो मोदीनगर में अपने रिश्तेदारों के यहां रूकने के बाद वाया हाइवे हरिद्वार जा रहा था बागपत फ्लाई ओवर पर अंधेरा पसरा होने की वजह से गाड़ी चला रहे युवक को साइड का लोहे का बैरियर नजर नहीं आया और गाड़ी उससे टकराकर दुर्घटना का शिकार हो गयी। परिवार के एक सदस्य की मौके पर ही मौत हो गयी, बाकि को सुभारती में एडमिट कराना पड़ा। लगातार हादसों के बाद भी हाइवे के बीच की स्ट्रीट लाइट की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस दिन अंधेरे की वजह से होने वाले हादसे से कोई बवाल हो जाएगा, शायद उसके बाद ही अफसरों की नींद टूटेगी।

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