
मेरठ। शहर में एक नाम ऐसा है जिनके रहते किसी को भी जिसके साथ वो खड़े हैं उन्हें किसी भी बात की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। ये अपनों का साथ किसी भी दशा में नहीं छाेड़ते। यह बात पहले सैकड़ों बार साबित हो चुकी है और एक बार फिर साबित हो गयी। बात हो रही है राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की। जो लोग राज्यसभा सदस्य को करीब से जानते हैं, वो इस बात से बखूबी वाकिफ होंगे। अच्छी बात यह है कि उन्हें करीब से जानने वालों में हम भी शामिल हैं। हम और हमारा दोस्त कमल वालिया, हालांकि वो आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन हमारे लिए यह सुखद है कि हम डा. वाजपेयी को शुरू से जानते हैं।उनक शुरू से ही लहजा मेरठ वालों के हितों के प्रति आक्रामक रहा है। बगैर नफे-नुकसान की परवाह किए बगैर वो कही भी भिड़ जाते हैं। दूसरी खासियत यह कि ना तो कभी किसी से नाराज ना किसी का विराेध, भले ही कोई कुछ भी समझे, लेकिन से कभी भी किसी से किसी भी मुद्दे पर नाराज नहीं होते, ये इनकी बड़ी खासियत है। इसका एक नहीं अनेक उदाहरण है, ताजा उदाहरण काली पलटन मंदिर पर तीन दशक से ज्यादा से लगने वाला पुलिस प्रशासन का कैंप है, जिसको किन्हीं कारणों से दवाब बनाकर कुछ छोटी सोच वालों ने अनुमति प बैरियर डाल दिया। इससे वो तमाम लोग परेशान हो उठे थे जिनमें बड़ी संख्या पुलिस प्रशासन के अफसरों की थी जिनके लिए दिनेश गोयल परिवार की ओर से लगाए जाने वाला यह कैंप है, मामला राज्यसभा सदस्य तक पहुंचा दिया गया। बस फिर तो सारी गुत्थियों का सुलझना तय था, प्रशासन के जो अधिकारी पहले अनुमति से इंकार कर चुके थे, उन्हाेंने ही खुद ही बुलाकर अनुमति का लेटर थमा दिया। इस कार्य में बड़ा सहयोग पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल का भी रहा। वो भी धर्म के कार्य में किसी प्रकार की बाधा से बहुत खिन्न हुए। बस फिर क्या था बेहद शार्ट टाइम में दिनेश गोयल परिवार ने भी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली कि अब उन्हें परेशान होने की कोई जरूरत नहीं। वहीं दूसरी ओर डा. वाजपेयी और राजेन्द्र अग्रवाल का आभार तो जताना ही था, उसमें भी दिनेश गोयल ने चूक नहीं की।