
रूस के बाद जापान पर मंडरा है भूकंप का बड़ा खतरा, लोग बुरी तरह से डरे, खाली कर रहे हैं इलाका

नई दिल्ली। दुनिया की महाशक्ति माने जाने वाले रूस को कैमटचका में आए विनाशकारी भूकंप ने बुरी तरह से हिला दिया है। रूस ही नहीं इस महाविनाशकारी भूकंप की लहरों ने दुनिया के कई देशों में दशहत बैठा दी है। खासकर उन शहरों में जो समुद्र के किनारे पर बसे हैं। फिलहाल जिस खतरे की बात की जा रही है, वो सबसे पहले जापान और अमेरिका में सकता है। जापान यदि तकनीक में आगे है तो अमेरिका खुद को दुनिया पहली महाशक्ति मानता है, इसी तरह का मिथक रूस के बारे में भी प्रचलित है, लेकिन कैमटचका में आए खतरनाक भूकंप और उठी लहरों ने यह बार फिर साबित कर दिया है, कुदरत जब चाहे अपनी ताकत का लोहा मनवा सकती है, उसके आगे कोई भी महाशक्ति नहीं। सबसे बड़ी महाशक्ति खुद प्रकृति है। कैमटचका में आए खतरनाक भूकंप से हुए महाविनाश के बाद इस इलाके में लाशों के ढेर लग गए हैं। ऐसा लगता है कि मानों किसी ने लाशों की खेती की हो। महाविनाश के मंजर को कोई भी कागजों पर नहीं उतार सकता। जहां तक नजर जाती है बर्बादी ही बर्बादी नजर आती है। ऐसा लगता है कि मानों इस इलाके में मौत का तांडव हुआ हो। 8.8 तीव्रता वाले भूकंप से दुनिया थर्रा गई है। इस भूकंप ने बता दिया है कि प्राकृति से छेड़खानी कभी भी उचित नहीं होती है। वैसे प्राकृति से छेड़खानी के मामले में भारत का ट्रैक रिकार्ड भी कोई बहुत अच्छा नहीं है। हिमालय की तलहटी में कई स्थानों में भारत में भी बड़े स्तर पर छेड़खानी की जा रही है। रूस तो किसी तरह इस आफत से निपटने की कूबत रखता है, लेकिन भारत पर शायद उतने संसाधन नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि कैमटचका में आए खतरनाक भूकंप के बाद उससे सबक लिया जाए। प्राकृति से छेड़खानी बंद कर दी जाए। सबसे ज्यादा जोर पेड़ों और जंगल को बचाने के पर दिया जा, लेकिन हो उलटा रहा है, पेड़ों का अंधाधुंध कटान किया जा रहा है। जंगलों को तेजी से खत्म किया जा रहा है। आने वाले वक्त में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर कैमटचका में आए खतरनाक भूकंप ने एक बार फिर से
2004 की आपदा की याद दिला दी है 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आए 9.1-9.3 तीव्रता के भूकंप से पैदा सुनामी ने मानवता को हिलाकर रख दिया था।
इस भूकंप से आई सुनामी के कारण इससे हिंद महासागर के तटीय क्षेत्र तबाह हो गए। इसकी मार भारत समेत चौदह देशों पर पड़ी थी। करीब 2.30 लाख लोगों की मौत हुई। जो बेहद डरावना आंकड़ा है। समुद्री लहरों ने तटीय इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया। उस दौरान श्रीलंका में एक ट्रेन ‘क्वीन ऑफ द सी’ लहरों में बह गई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है वो कितना शक्तिशाली विनाशकारी भूकंप था।