नई दिल्ली। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सरीखे देश के बड़े नेताओं को हिरासत में लेकर भाजपा शासित केंद्र सरकार ने और कुछ नहीं बल्कि इंडिया गठबंधन को एकजुट करने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया गठबंधन को एकजुट रखने का जो काम कांग्रेस के तमाम बड़े नेता नहीं कर पाए रहे थे वो काम गृहमंत्री अमित शाह की पुलिस ने एक झटके में कर दिया। सोमवार को जो कुछ नई दिल्ली में हुए उसका सीधा फायदा और किसी को नहीं बल्कि इंडिया गठबंधन और सीधा कांग्रेस को हुआ है। यह भी बताया जा रहा है कि जो काम कांग्रेस अब तक नहीं कर सकी थी, वो काम सोमवार के घटनाक्रम के बाद हो गया। सबसे बड़ी सफलता तो आम आदमी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी से रही। हालांकि अभी हो नहीं रहे हैं, लेकिन दिल्ली विधानसभा और उससे पूर्व लोकसभा चुनाव के नजरिये से यदि देखा जाए तो भाजपा इसमें घाटे में राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि सोमवार को विपक्ष खेमे को यदि चुनाव आयोग के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने दिया जाता तो जो राजनीतिक लाभ इंडिया गठबंधन को मिला है, वो नहीं मिल पाता। हिरासत में लेकर तो उड़ता तीन पकड़ लिया। इंडिया गठबंधन के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी संजय राउत को हिरासत में लिया गया। उसके बार सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पुलिस की बैरिकेटिंग फांद दी तो उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। इस विरोध प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह भी पूरे रंग में नजर आए। बड़ा हमला प्रियंका गांधी ने बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार डरी हुई है। राहुल गांधी ने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि संविधान को बचाने की लड़ाई है। सरकार व चुनाव आयोग बात करने से डर रहे हैं। सोमवार को विपक्ष के तीन सौ से ज्यादा सांसदों ने पैदल मार्च निकला, लेकिन पुलिस ने बीच में ही उन्हें डिटेन कर लिया। ये सभी चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाना चाहते थे, लेकिन उससे पहले ही हिरासत में ले लिए गए। राहुल, प्रियंका व अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर देश में जंगल की आग की तरह फैल गयी। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। इस मौके पर अखिलेश यादव ने सरकार पर पुलिस बल के प्रयाेग के आरोप लगाए। विपक्ष के तमाम सांसद सरकार पर हमलावर थे।