कहीं पार्किग बना ली गयी है तो कहीं फल सब्जी के ठेले लग रहे हैं, भारत की पहली क्रांति के गवाह रहे मुजस्मे आज बदहाली की दशा में
मेरठ। 10 मई 1857 को भारत की पहली क्रांति के गवाह रहे मुजस्मे आज बदहाली की दशा में हैं। ठीक रखरखाव न होने के चलते ये तमाम स्थल पुरसा हाल नहीं। और तो और जहां भी स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं, उचित रखरखाव ना होने की वजह से वो भी अपनी बदहाली के लिए सिस्टम को ही कोस रहीं लगती हैं। 10 मई प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के गवाह रहे थाना सदर बाजार के पुलिस कर्मियों के बलिदान को दर्शाने वाले माइल स्टोन को जिसको उत्तर प्रदेश टूरिज्म विभाग ने लगावा तो दिया, लेकिन उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संभवत किसी को नहीं दी गई, जिसके चलते उसकी दशा आसपास के लोगों ने बद से बदतर कर दी। ऐसे ही एक अन्य माइल स्टोन के पास किसी मार्बल कारोबारी ने अपने प्रतिष्ठान का सामान आसपास वहां रख दिया है। इससे यह तो साफ हो गया कि 10 मई 1857 के अपने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति लोग कितनी श्रद्धा रखते हैं। कुछ लोगों ने टूरिज्म विभाग की ओर से लगवाए गए ऐसे ही माइल स्टोनों के आगे गाड़ियों की पार्किग बना ली है। लगता है कि लोगों ने प्रथम स्वतंत्रा संग्राम में प्राणों की आहूति देने वालों को बिसरा दिया है। साथ ही यह भी कि शहीदों के प्रति कितना मान सम्मान हमारे दिल में है। कुछ माइल स्टोन के आगे रोड का पलस्तर उखड़ा हुआ है। ऐसा केवल सदर बैंक स्ट्रीट के आसपास ही नहीं है, शहर की पुरानी आबादी वाले इलाकों में जहां भी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हुई क्रांति के दौरान आजादी के लिए अंग्रेजों की जेल में यातनाएं सहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं लगी हैं, वहां कहीं तो रिक्शा स्टैंड बना दिए गए हैं तो किसी के आसपास चांट व फलों की ठेले लगा दिए गए हैं। नौंचदी में जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं लगी हैं, वहां बारिश के दौरान गंदगी पसर जाती है। उम्मीद है कि स्तंत्रता दिवस से पूर्व इन स्थलों की दशा सुधार ली जाएगी।