आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने की खबर से बिजली कर्मियों में उबाल, चेतावनी! निजीकरण का टेंडर निकला तो भरेंगे जेल
मेरठ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो आंदोलनकारी कर्मचारी योगी सरकार की जेलों को भर देंगे। दरअसल यहां जानकारी मिली कि आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखकर निजीकरण की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। संघर्ष समिति के आंदोलन को तीन सौ दिन पूरे हो चुके हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि निजीकरण के लिए जोरजबरदस्ती की गई तो परिणाम घातक होंगे।
टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी। संघर्ष समिति के संयोजक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने मंगलवार को शक्ति भवन मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि झूठे आंकड़ों, दमन और उत्पीड़न के नाम पर निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आॅल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी जाएगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी। करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूमेंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है। विक्टोरिया पार्क स्थित मुख्य अभियंता वितरण प्रथम/द्वितीय मेरठ कार्यालय परिसर हुए विरोध प्रदर्शन में सीपी सिंह, आलोक त्रिपाठी, प्रगति राजपूत, गोपी चंद, अश्विनी, कपिल देव गौतम, विवेक सक्सेना, महेश चंद शर्मा आदि तमाम कर्मचारी भारी संख्या में मौजूद रहे।