नगर निगम में ठेकेदारी प्रथा होनी है खत्म, पूर्व नगरायुक्त अमित शर्मा ने भेजा था पत्र, सौरभ गंगवार ने भी भेजा था रिमांडर, शासन के ग्रीन सिग्नल के बाद यूटर्न
मेरठ। नगर निगम से सफाई कार्य के लिए ठेकेदार प्रथा खत्म करने की अनुमति के लिए निगम प्रशासन पहले तो रिमांडर भेज रहा था, लेकिन जब सीएम योगी के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने नगरायुक्त के नाम अग्रिम कार्रवाई को पत्र लिखा तो उन्होंने यूटर्न ले लिया। यह आरोप हिन्द मजदूर सभा के जिला सचिव विनेष विद्यार्थी ने सूबे के सीएम, मंडलायुक्त व जिलाधिकारी के समक्ष लगाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि सीएम के ज्वाइंट सेक्रेटरी के पत्र के बाद ऐसा क्या हो गया जो जिस विषय को लेकर नगरायुक्त पहले शासन को रिमांडर भेज रहे थे जब शासन से कार्रवाई की अनुमति की बात आयी ताे उन्होंने यूटर्न ले लिया। इतना ही नहीं केवल यूटर्न ही नहीं लिया बल्कि यहां तक कह दिया कि साल 2016 के शासनादेश के चलते यह संभव ही नहीं है। इस विषय पर निगम के पूर्व नगरायुक्त अमित पाल शर्मा ने ठेकेदार प्रथा खत्म करने के शासन ने अनुमति का आग्रह करते हुए पत्र भेजा था
सांसद-विधायक की मौजूदगी में हुआ था प्रस्ताव पास
नगर निगम की बोर्ड बैठक मे निगम से ठेकेदारी प्रथा समाप्त किए जाने के लिए 20 जून 2023 को प्रस्ताव पास कर शासन को भेजा गया था। इस बोर्ड बैठक में सूबे की योगी सरकार के तत्कालीन सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, ऊर्जा राज्यमंत्री डा. साेमेन्द्र तोमर, विधायक अमित अग्रवाल व एमएलसी धर्मेेंद्र भारद्वाज भी मौजूद थे। निगम के पूरे सदन की मौजूदगी यह ठेकेदरी प्रथा खत्म करने का प्रस्ताव तत्कालीन नगरायुक्त अमित पाल शर्मा के हस्ताक्षर से भेजा गया था।उसके बाद अमित पाल शर्मा का यहां से ट्रांसफर हो गया और शासन ने नगरायुक्त पद पर सौरभ गंगवार को यहां भेजा। विनेष विद्यार्थी ने बताया कि 4 जुलाई को पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव के सापेक्ष नगरायुक्त ने एक रिमांइंडर शासन को भेजकर ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई की अनुमति मांगी थी। लेकिन कोई रिप्लाई नहीं मिला।
महापौर ने किया सीएम से आग्रह
इसी मुददे को लेकर बाद में महापौर हरिकांत अहलूवालिया सीएम योगी से लखनऊ में मिले और उनसे मेरठ नगर निगम में ठेकेदारी प्रथा समाप्त किए जाने की अनुमति का आग्रह किया। विनेश विद्यार्थी बताते हैं कि महापौर के आग्रह को स्वीकार किया गया और सीएम के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने एक पत्र नगरायुक्त को उक्त संबंध में अग्रिम कार्रवाई को भेजा, लेकिन ज्वाइंट सेक्रेटरी के पत्र के बाद नगरायुक्त ने अचानक यूटर्न लेते हुए ठेकेदारी प्रथा समाप्त किए जाने में साल 2016 के शासनादेश का हवाला देते हुए असमर्थता व्यक्त कर दी। इससे सबसे ज्यादा झटका उन सपुाई कर्मचारियों को लगा जो ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की सालों से बाट जोह रहे थे। ऐसा क्यों किया गया हिन्द मजदूर सभा के जिला सचिव का कहना है कि यह आज तक स्पष्ट नहीं किया जा रहा है।
मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को कराया अवगत
ठेकेदारी प्रथा समाप्त किए जाने को लेकर जो कुछ हुआ और चल रहा है उस पूरे मामले की जानकारी हिन्द मजदूर सभा के प्रतिनिधि मंडल ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी दी। इतना ही नहीं संपूर्ण समाधान दिवसों पर भी अनेकों बार इस मामले को उठाया जा चुका है। मंडलायुक्त व जिलाधिकारी के यहां से नगरायुक्त कार्यालय तमाम पत्र भी भेजे गए, लेकिन विनेष विद्यार्थी का आरोप है कि उन पत्रोका कभी रिप्लाई नहीं दिया जाता।
यह कहना है महापौर का
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि वह इस संबंध में सीएम से मिले थे, प्रस्ताव दिया था, लेकिन अफसर कुछ करने को तैयार नहीं। जिस तरह से गुजरात और मध्य प्रदेश में महापौर को शक्तियां दी गयी हैं यदि यूपी में भी वैसा हो जाए तो सभी समस्याओं का तत्काल निदान भी हो जाए। उन्होंने बताया कि वह इसको लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी और इसको लेकर नगरायुक्त सौरभ गंगवार से बात करने का प्रयास किया तो कॉल रिसीव नहीं की गयी।