वंदे मातरम पर बहस से करा ली फजीहत, असल मुद्दों से भागने की कोशिश, विपक्ष बोला बिहार से अब बंगाल में पहुंच गए है घुसपैठिए
नई दिल्ली। वंदे मातरम गीत पर बहस कराकर सरकार ने अपनी फजीहत करा ली। जो बातें देश की जनता अब तक नहीं जानती थी, उन बातों से भी सरकार पर हमलावर विपक्ष ने देश की जनता को रूबरू करा दिया। इस बहस का सबसे बड़ा नुकसान आरएसएस को हुआ बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार ने खुद ही अपना विकेट गंवाने का काम किया है। गीत पर बहस को विपक्ष ने ‘इतिहास का अपमान’ बताते हुए सरकार पर भारी हमला बोला। लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे के बीच विपक्ष ने बहस को ‘लोकलुभावन डायवर्शन’ करार दिया, जो बेरोजगारी, महंगाई और ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। नतीजा? विपक्ष की चुटकी और वॉकआउट ने सरकार की चाल को उजागर कर दिया।
मुद्दों व समस्याओं से भागने की कोशिश
विपक्ष ने बहस के दौरान सरकार पर लोगों की समस्याओं से भागने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि और भी कई बड़े मुद्दे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “यह बहस संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। नेहरू ने तो गीत को आजादी की आवाज बनाया, आप क्यों पुरानी जंग को फिर हवा दे रहे हैं? असल मुद्दे – बेरोजगारी, महंगाई – पर बहस कराइए!” राहुल गांधी ने भी सरकार को ‘इतिहास की तोड़फोड़’ करने वाला बताया, जबकि गौरव गोगोई ने मोदी के भाषण में ‘कांग्रेस’ का 50 बार जिक्र गिनाकर तंज कसा: “यह वंदे मातरम पर बहस है या कांग्रेस-बैशिंग पर?”
मल्लिकार्जुन खड़गे पीएम मोदी पर बरसे
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने जोरदार हमला बाेलते हुए कहा कि “कांग्रेस ने ही वंदे मातरम को आजादी का नारा बनाया। आपकी RSS वाली विचारधारा तो ब्रिटिश के साथ थी, जब हम जेलों में थे। यह बहस बंगाल चुनाव के लिए है, न कि देश के लिए!” TMC सांसदों ने बंगाल के आइकॉन्स का ‘अपमान’ होने पर साइलेंट प्रोटेस्ट किया, जबकि शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “यह गीत एकता का था, अब विभाजन का हथियार बन गया। विपक्ष ने झूठे नैरेटिव को बेनकाब कर दिया।”
कामयबा रही विपक्ष की रणनीति
विपक्ष की रणनीति कामयाब रही। 10 दिसंबर को राज्यसभा में शाह के ‘अवैध घुसपैठिए’ वाले बयान पर विपक्ष ने वॉकआउट किया, जो मीडिया में ‘सरकार की हार’ के रूप में चला। कांग्रेस ने 3 सवाल उठाए: नेहरू पर बहस क्यों, जब संविधान सभा ने फैसला ले लिया? आर्थिक संकट पर चर्चा क्यों नहीं? और बंगाल चुनाव से पहले यह ‘ध्रुवीकरण’ क्यों? एक वरिष्ठ न्यायाधीश (रिटायर्ड) ने लिखा, “यह NDA की विवादास्पद मंशा है, जो गैर-मुद्दे को हवा दे रही है।” सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव ने BJP को ‘राष्ट्र-विभाजक’ कहा, जबकि विशाल ददलानी ने तंज कसा: “बहस से बेरोजगारी हल हो गई क्या?” सरकार का ऐतिहासिक हमला उल्टा पड़ा। विपक्ष ने इसे ‘डायवर्शन टैक्टिक’ साबित कर जनता के बीच असल मुद्दों को जोर दिया। बहस ने वंदे मातरम को फिर से याद दिलाया, लेकिन राजनीतिक लाभ विपक्ष को मिला। क्या यह 2026 के बंगाल चुनाव का ट्रेलर है? विपक्ष कहता है – हां!