अवैध कब्जे हटाने के बजाए सेटिंग, भजपाइयों की शिकायत पर भी अफसर कार्रवाई को तैयार नहीं, सीएम ग्रिड में ठेकेदार का पलीता अफसर बे-खबर
मेरठ।सूबे के सीएम योगी का ड्रिम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली सीएम ग्रिड योजना को कार्यदायी संस्था का ठेकेदार पलीता लगाने पर तुला हुआ है। योजना के तहत पूरे महानगर में नाले नालियां बनायी जा रही है, लेकिन जो नाले नालियां बनायी जा रही है वहां कुछ स्थानों पर लोगों से सरकारी स्थान पर अवैध कब्जे किए हुए हैं। ठेकेदार इन अवैध कब्जों को हटाने के बजाए जिन्होंने अवैध कब्जे किए हैं, उनसे सेटिंग पर उतारू है और जहां सेटिंग हो जा रही है वहां नाले तिरछा कर दिया जा रहा है। गढ रोड शोहराब गेट बस स्टेंड के सामने भी ऐसा ही किया गया। इसकी शिकायत भाजपा के महानगर प्रवक्ता व इलाके के लोगों ने कमिश्नर से भी की, लेकिन फिर भी नाला तिरछा ही बना। दिल्ली रोड पर भी ऐसा ही किया। आरटीआई एक्टिविस्ट सुशील रस्तौगी बताते हैं कि दिल्ली रोड के अलावा भी तमाम स्थानों पर नाले तिरछे कर दिए गए हैं, जिनसे बारिश में जल भराव होना तय है। इससे अफसर बेखबर बने हुए हैं।
इस मामले को लेकर सबसे पुरजोर तरीके से आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत शर्मा ने आवाज उठायी है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार जिस तरह से सीएम ग्रिड योजना के तहत काम कर रहा है और अफसर बजाए उस पर कार्रवाई के केवल तमाश देख रहे हैं, उससे इस योजना में लगाया जा रहा पब्लिक के टैक्स का पैसा अकारथ ही साबित होगा। नाले नालिया तिरछी कर दिए जाने से पूरा शहर बारिश मे टापू की मानिंद डूब जाएगा। पुनीत शर्मा ने मंडलायुक्त से इस संबंध में जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
सीएम ग्रिड को तो बख्श दो
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (सीएम ग्रिड योजना) के तहत मेरठ शहर में कई सड़कों का चौड़ीकरण और कायाकल्प चल रहा है। इस योजना में सड़कों के साथ-साथ नाले-नालियों का निर्माण, उन्हें ढककर फुटपाथ बनाना, भूमिगत बिजली केबलिंग और ग्रीन जोन शामिल हैं। लेकिन शहर के विभिन्न इलाकों में ठेकेदारों द्वारा अवैध अतिक्रमण और कब्जे हटाए बिना ही नाले और नालियां तिरछी बना दी जा रही हैं, जिससे जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासियों और पार्षदों का आरोप है कि ठेकेदार गुणवत्ता से समझौता कर काम कर रहे हैं, जबकि अधिकारियों की मिलीभगत से अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं हो रही।
सीएम ग्रिड योजना का उद्देश्य और मेरठ में कार्य
सीएम ग्रिड योजना उत्तर प्रदेश के 17 प्रमुख शहरों में आधुनिक सड़कें बनाने की योजना है, जिसमें मेरठ भी शामिल है। यहां गांधी आश्रम चौराहे से तेजगढ़ी चौराहे तक गढ़ रोड का चौड़ीकरण प्रमुख प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत करीब 47 करोड़ रुपये है। योजना के तहत सड़क को 36 मीटर चौड़ा किया जा रहा है, नाले ढककर फुटपाथ बनाए जा रहे हैं, रेलिंग लगाई जा रही हैं ताकि आगे अतिक्रमण न हो, और ग्रीन डिवाइडर के साथ पार्किंग की व्यवस्था हो रही है, लेकिन शोहराब गेट डिपो के सामने नाला तिरछा कर दिया गया है।
अतिक्रमण की समस्या और ठेकेदारों की लापरवाही
सीएम ग्रिड के कई प्रोजेक्ट्स में अतिक्रमण सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। गढ़ रोड पर अवैध निर्माण और कब्जों के कारण प्रस्तावित चौड़ाई 45 मीटर की जगह सिर्फ 36 मीटर ही संभव हो पाई है। पार्षदों और निवासियों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार अतिक्रमण हटाने की बजाय नाले और नालियां तिरछी या अनियमित ढंग से बना रहे हैं, ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। इससे पानी का बहाव प्रभावित होगा और बारिश में सड़कें पानी से भर जाएंगी।
पार्षद कर चुके हैं प्रबल विरोध
एक प्रमुख मामले में तेजगढ़ी से गांधी आश्रम के बीच सड़क निर्माण पर विवाद हुआ। पार्षद प्रवीण अरोड़ा सहित कई लोगों ने शिकायत की कि अतिक्रमण हटाए बिना काम किया जा रहा है, जिसके बाद नगर निगम ने जांच शुरू की और कुछ समय के लिए काम रोका गया। ठेकेदारों पर आरोप है कि वे सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को छोड़कर आसपास से रास्ता निकाल रहे हैं, जिससे नालियां सीधी की बजाय तिरछी हो रही हैं। प्रदेश स्तर पर भी सीएम ग्रिड योजना में अतिक्रमण बड़ी चुनौती है। कई शहरों में स्थानीय लोगों के अवैध कब्जों से चौड़ीकरण प्रभावित हो रहा है। मेरठ नगर निगम और मेडा (मेरठ विकास प्राधिकरण) को बार-बार निर्देश दिए गए हैं कि अतिक्रमण हटाकर ही काम करें, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई धीमी है।
शिकायतें और संभावित प्रभाव
लोगों का आरोप है कि तिरछी नालियां बनने से पानी का प्रवाह बाधित होगा, जिससे हर बारिश में जलभराव होगा। पहले से ही मेरठ में जल निकासी की समस्या है, और अगर नाले सही ढंग से नहीं बने तो स्थिति और खराब हो जाएगी। व्यापारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने से उनकी दुकानें प्रभावित होंगी, लेकिन बिना हटाए काम करने से लंबे समय में पूरा शहर प्रभावित होगा। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि जांच चल रही है और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन ठेकेदारों पर पांच साल का रखरखाव का दायित्व होने के बावजूद शिकायतें बढ़ रही हैं।
आगे की कार्रवाई
नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता को निर्देश दिए गए हैं कि अतिक्रमण पर सख्ती करें और काम की गुणवत्ता जांचें। अगर अनियमितताएं पाई गईं तो ठेकेदारों पर कार्रवाई हो सकती है। निवासी सोशल मीडिया और शिकायत पोर्टलों पर आवाज उठा रहे हैं, ताकि योजना का सही क्रियान्वयन हो। यह मामला सीएम ग्रिड योजना की चुनौतियों को उजागर करता है, जहां विकास और अतिक्रमण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।