नो टेंशन! कैंट में कहीं भी करो कब्जा

kabir Sharma
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कार्रवाई के बजाए दी जाएगी सुविधा, सरकुलर रोड की तर्ज पर कर सकते हैं कब्जे, पार्किंग की सुविधा देगा कैंट बोर्ड

मेरठ। छावनी इलाके में खासतौर से जो इलाका सेना की एवन लेंड से सटा हुआ है जहां फौजी अफसरों की मल्होत्रा एन्क्लेव सरीखी कालोनी भी है, ऐसी इलाके में भारत सरकार की भूमि पर कब्जा कर होटला ढावे बनाकर वहां शराब पीने पिलाने की सुविधा मुहेय्या कराने में अब कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि कैंट के अफसर ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं। भले ही इसकी वजह से मल्होत्रा एन्क्लेव सरीखी फौजी कालोनी की सुरक्षा को ही खतरा क्यों ना पैदा हो जाए।

या तो बे-खबर है या खबर रखना नहीं चाहते

सरकुलर रोड पर सरकारी जमीन पर जिन अवैध कब्जों की बात बतायी जा रही है उनसे या तो कैंट के अफसर बे-खबर बने हुए हैं या फिर जानबूझ कर उसकी खबर रखना नहीं चाहते। यहां एक दो नहीं दुकानें नहीं बल्कि सरकारी जगह पर कब्जा कर अवैध रूप से बनायी गयी दुकानों की अब मंड़ी सरीखा बाजार सजाता है। यह सारा इलाका होटल नैन्सी जो अरसे पहले बंद हो चुका है उससे सटा हुआ है। इस जगह पर कई-कई दुकानें जो सरकार की जगह को कब्जा कर बनायी गयी हैं अब लगने लगी हैं। हैरानी तो यह है कि ये सभी दुकानें मेन सरकुल रोड तक आ गयी हैं। इनमें एक होटल तो ऐसा है जो एक फुट रोड को कब्जाए हुए हैं। इतना कुछ होने के बाद भी कैंट के अफसर इससे पूरी तरह से बे-खबर बने हुए हैं। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि इसके लिए जिम्मेदार रेवेन्यू सेक्शन ने सीईओ कैंट को इसी जानकारी ही नहीं दी हो, क्योंकि आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि किसी मामले की जानकारी मिलने पर सीईओ बोर्ड के एई से एक्शन कराने में देरी नहीं लगाते। और यदि सरकारी जगह पर कब्जे की जानकारी है तो फिर सवाल तो सीईओ से भी पूछा जाएगा कि उनके रहते हुए यह सब क्यों और कैसे हो सकता है।

अवैध कब्जा ही नहीं दुकान होटल ढावे व दुकानें भी हैं अवैध

सरकुलर रोड पर केवल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे ही नहीं किए गए हैं बल्कि यहां जो होटल ढावे व दुकानें हैं वो भी अवैध चलाए जा रहे हैं। क्योंकि सरकारी जमीन पर इस तरह के किसी निर्माण के किए जाने की अनुमति कभी नहीं दी जा सकती। दूसरी बात यह कि यहां जितने भी होटल व ढावे संचालित किए जा रहे हैं वो बगैर फूड लाइसेंस के संचालित किए जा रहे हैं, यदि फूड लाइसेंस लिया गया है तो फिर बोर्ड अफसरों से यह सवाल है कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाए गए होअल ढावे को किस प्रकार से फूड लाइसेंस दिया गया। क्या मौके पर जाकर मुआयना किया गया। यदि मुआयना किया गया है तो फिर सरकारी जगह पर कब्जा करने वालों से ज्यदा लाइसेंस जारी करने वाले कसूरवार हैं।

स्टाफ क्या सोया रहा

कैंट बोर्ड के सेनेट्री सेक्शन के स्टाफ की यह ड्यूटी है कि सुबह के वक्त जहां भी वो साफ सफाई के कार्य के लिए जाता है पूरे कैंट में यदि कहीं भी कोई अवैध निर्माण या सरकारी जमीन पर कब्जा जैसा की सरकुलर रोड पर किया गया है मिलता है तो उसकी रिपोर्टिंग सेनेट्री सेक्शन हेड को की जाती है। सेक्शन हेड इसकी सूचना सीईओ को देते हैं। सूचना पुष्टि पर सीईओ एक्शन के आदेश देते हैं, लेकिन सरकुलर रोडके अवैध होटल ढावों के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। तो यह मान लिया जाए कि सेनेट्री स्टाफ ने अपनी ड्यूटी को सही अंजाम नहीं दिया।

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वजह जो भी रही हो, लेकिन सरकारी जमीन पर जो मेन रोड से सटी हुई है, वहां पर पहले कब्जा करना और फिर अवैध होटल ढावे व फलों सब्जी की दुकानों को बना लेना गैर कानूनी होने के अलावा दूसरी और गंभीर बात इनका मल्होत्रा एन्कलेव सरीखी फौजी अफसरों की कालोनी के पास होना है।

बोर्ड का गजब निर्णय

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों ने जो किया सो किया, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल तो कैंट बोर्ड की बैठक में लिया गया फैसला है जिसमें निर्देश दिए गए हैं कि सरकुलर रोड पर जो सरकारी जमीन पड़ी है वहां पार्किग स्थल बना दिया जाए ताकि सरकुलर रोड पर जो लोग आते हैं उन्हें रोड पर गाड़ियां पार्क ना करनी पड़े। यहां बता दें कि सरकुलर रोड पर जो गाड़ियां रोड पर पार्क होती हैं उनमें बड़ी संख्या उन गाड़ियों की होती है जो इन होटल व ढावों पर रूकती हैं और घंटों गाड़ियों में पीने पिलाने के दौर चलते रहते हैं। अब क्यों ना ना लिया जाए कि कैंट में भारत सरकार की भूमि का कब्जाने वालों के लिए तमाम सुविधाएं भी मुहैय्या कराई जा रही हैं।

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