सूबे में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए, मेरठ में 6.65 लाख वोटरों के नाम साफ, अभी भी मौका है फॉर्म 6 7 8 भरने का बन जाएगी वोट
नई दिल्ली/लखनऊ। SIR के नाम पर चलाए गए अभियान में पूरे उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए, मेरठ में 6.65 लाख वोटरों के नाम साफ, अभी भी मौका है फॉर्म 6 7 8 भरने का नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी आ रही है कि 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की कीमत भाजपा को चुकानी पड़ सकती है क्योंकि वोट बनवाने के मामले में मुसलमान अधिक सचेत नजर आए और इस मामले में हिन्दू उदासीन बताए जा रहे हैं।
SIR के बाद ड्राफ्ट जारी,
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया में राज्य की पहले वाली 15.44 करोड़ मतदाताओं की सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 18.7% है। अब ड्राफ्ट सूची में केवल 12.55 करोड़ मतदाता शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह छंटनी मुख्य रूप से मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए लोगों और डुप्लीकेट पंजीकरण के कारण की गई है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान
सूबे के जिन जिलों में SIR से कीमत चुकानी पड़ सकती है उनमें लखनऊ पहले नंबर पर है। यहां सबसे ज्यादा प्रभावित, करीब 12 लाख नाम हटे। प्रयागराज, कानपुर, गाजियाबाद और मेरठ समेत अन्य शहरी क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में छंटनी हुई।
ये हैं आंकड़े
सूबे में SIR के दौरान जैसा की चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए (करीब 3%)। 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित, अनुपस्थित या गायब (करीब 14%)। 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह पंजीकृत)।
विपक्ष ने उठाया सवाल
कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे “बड़ी साजिश” करार दिया और जांच की मांग की। कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल का भी नाम सूची से हट गया, जबकि वे लंबे समय से मतदाता हैं। पार्टी का आरोप है कि पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के नाम चुनिंदा तरीके से हटाए गए हैं। कांग्रेस ने जिलास्तरीय कमेटियां गठित की हैं जो हटाए गए नामों की जांच करेंगी।