युवाओं में हताश व गुस्सा, पूछा कायदे की एक परीक्षा तक नहीं आयोजित करा सकते, क्यों नहीं की जा रही अफसरों पर कार्रवाई
नई दिल्ली/लखनऊ। यूपी में पेपर लीक विधेयक पास कर कानून बना दिया गया है। पढ़े लिखे युवाओ को नौकरी व राेजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए परीक्षाएं आयोजित करायी जाती हैं, लेकिन जब परीक्षाएं ही बार-बार रद्द की जाती रहेंगी तो फिर कहां से तो रोजगार मिलेगा और कैसे युवाओं से किया रोजगार का वादा पूरा हो सकेगा। कायदे से एक परीक्षा तक आयोजित नहीं करायी जा रही है। इससे विपक्ष तो छोड़िये युवाओं में भी हताशा और गुस्सा है। यूपी में पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण परीक्षाओं को रद्द करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। साल 2017 से अब तक, कम से कम 7 प्रमुख भर्ती और बोर्ड परीक्षाएं रद्द की जा चुकी हैं। सुरक्षित परीक्षाओं का आयोजन सरकार का नैतिक दायित्व है, लेकिन यूपी में आए दिन परीक्षा रद्द की खबर सामने आती है। जो प्रमुख परीक्षाएं रद्द की गयी है उनमें ज्यादातर मामलों में पेपर लीक मुख्य वजह रहा है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को रद्द करने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है।
कमी कानून में नहीं लागू करने वालों में
परीक्षा को सफलता पूर्वक आयोजन कराने के लिए यूं कहने को कानून बनाए गए हैं, लेकिन कमी कानूनों में नहीं बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाले सिस्टम के अफसरों में है। उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) ऑर्डिनेंस 2024, जिसमें उम्रकैद और 1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। फिर भी, समस्या जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, प्रिंटिंग से लेकर वितरण तक की चेन में कमजोरियां और संगठित गिरोहों की सक्रियता मुख्य कारण हैं। विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता बताते हुए युवाओं के साथ धोखा करार दे रहे हैं।
रद्द की गयी परीक्षाएं खोल रही है दावों की पोल
साल 2917 से साल 2926 तक जो परीक्षाएं रद्द की गयीं है उनकी विस्तार से जानकारी नीचे दी गई तालिका में उन प्रमुख परीक्षाओं का विवरण है जो पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं के कारण रद्द की गईं। यह सूची विभिन्न रिपोर्ट्स और जांचों पर आधारित है:
| वर्ष | परीक्षा का नाम | कारण | प्रभावित अभ्यर्थी (लगभग) | क्या हुआ आगे? |
|---|---|---|---|---|
| 2017 | इंस्पेक्टर्स ऑनलाइन रिक्रूटमेंट टेस्ट | पेपर लीक | अज्ञात | दोबारा आयोजित की गई। |
| 2021 | यूपीटीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) | पेपर लीक, व्हाट्सऐप पर वायरल | 20 लाख | परीक्षा रद्द, दोबारा नवंबर 2021 के बाद आयोजित। एनएसए के तहत कार्रवाई। |
| 2021 | प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (पीईटी) | पेपर लीक | लाखों | रद्द, नए सिरे से आयोजित। |
| 2022 | यूपी बोर्ड क्लास 12 इंग्लिश परीक्षा | पेपर लीक (बलिया में) | लाखों (24 जिलों में) | 24 जिलों में रद्द, बाकी में जारी रही। |
| 2024 | यूपी पुलिस कांस्टेबल रिक्रूटमेंट एग्जाम | पेपर लीक, सोशल मीडिया पर वायरल | 48 लाख | रद्द, 6 महीने में दोबारा अगस्त 2024 में आयोजित। एसटीएफ जांच। |
| 2024 | यूपीपीएससी आरओ/एआरओ प्रीलिम्स | पेपर लीक | 10 लाख | रद्द, दोबारा आयोजित। अभ्यर्थियों के विरोध के बाद फैसला। |
| 2025 | असिस्टेंट प्रोफेसर रिक्रूटमेंट एग्जाम | पेपर लीक और अनियमितताएं | 1.14 लाख | 2026 में रद्द, नए सिरे से आयोजित करने के निर्देश। एसटीएफ ने 3 गिरफ्तार। |
इनके अलावा, कुछ अन्य परीक्षाएं जैसे हेड रेडियो ऑपरेटर्स (2024) और असिस्टेंट टीचर्स रिक्रूटमेंट (2019) भी रद्द हुईं, लेकिन वे पेपर लीक से अलग कारणों (जैसे योग्यता बदलाव या आरक्षण नियम उल्लंघन) से थीं। कुल मिलाकर, 2017-2022 के बीच ही 6 मामले दर्ज हुए थे, और उसके बाद संख्या बढ़ती गई।
हर बार दावा हर बार पेपर लीक
दावा तो हर बार जीरो टॉलरेंस नीति का किया जाता है। असिस्टेंट प्रोफेसर मामले में एसटीएफ ने जांच की और गिरफ्तारियां कीं। सरकार ने उत्तर प्रदेश एजुकेशन सर्विस सेलेक्शन कमीशन बनाया ताकि भर्तियां सुव्यवस्थित हों। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि डिजिटल सुरक्षा, केंद्र आवंटन और जांच प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। अभ्यर्थी अक्सर विरोध प्रदर्शन करते हैं, जैसे 2024 में पुलिस भर्ती के बाद।यह मुद्दा राजनीतिक भी बन चुका है। विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने इसे युवाओं के साथ धोखा बताया है। आने वाले चुनावों में यह बड़ा फैक्टर हो सकता है। सरकार का दावा है कि नई परीक्षाएं पारदर्शी होंगी और अभ्यर्थियों को मुफ्त बस सुविधा मिलेगी।