
सचिन सिरोही ने ऐसा क्या कह दिया, मां की निर्मम हत्या कर बेटी का अपहरण क्यों नहीं किए जाने चाहिए आरोपी लंगड़े, जिनसे उम्मीद थी उन्होंने की खुलकर राजनीति
मेरठ। कपसाड़ में घर में घुसकर दलित की बेटी का अपहरण कर लिया जाता। मां बचाने आती है तो दबंग उसकी हत्या कर देते हैं। बेटी को उठा ले जाते हैं। यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि दबंग यदि अपनी पर उतर आएं तो उन्हें ना तो अपहरण से गुरेज है ना हत्या से परहेज है और वो सब कपसाड़ में देखने को मिला। बेटी का अपहरण और मां की हत्या से बड़ी जघन्य वारदात दूसरी हो नहीं सकती। और इससे भी बड़ी और शर्मसार करने वाली घटना पीड़ित को बजाए इंसाफ के मैनेजमेंट किया जाना रहा। जिस वक्त मैनेजमेंट का खेल चल रहा था, उसी दौरान वहां अचानक हिन्दूवादी नेता सचिन सिरोही पहुंचते हैं। मैनेजमेंट का पूरा प्लेटफार्म तैयार था उसी दौरान अचानक सचिन सिरोही बोल उठते हैं कि जब तक अपृहत बेटी बरामद नहीं हो जाती और मां के हत्यारे गिरफ्तार नहीं कर लिए जाते तब तक कोई आश्वासन नहीं।
बुरी लग गयी सचिन की बात
सचिन सिरोही की यह बात ना-गवांर गुजरी। भाजपा में साइड लाइन कर दिए गए पूर्व विधायक संगीत सोम पीड़ित परिवार के जिन सदस्यों को मामले को मैनेज करने के लिए समझा रहे थे, उन्हें वहां से उठाकर छत पर ले गए। इसी बीच खबर आयी कि परिजन मां का अंतिम संस्कार करना के लिए राजी हो गए है। सिस्टम भी यहीं चाहता था। मैनेजमेंट सफल हो गया। सबसे बड़ी हैरानी विधायक अतुल प्रधान को लेकर सामने आयी। पूरे दिन बवाल काटने वाले अतुल प्रधान बेटी के बरामद होने व आरोपियों की गिरफ्तारी के सवाल पर शाम ढलते-ढलते क्यों पहले जैसे तेवर में नहीं थे। सुनने में आया है कि किसी भी वक्त वो बेटी आ सकती है जिसको घर में घुसकर उठा कर ले गए उसकी मां की हत्या कर दी। यह भी सुनने में आया है कि आरोपी की गिरफ्तारी कर उसको भेज भेज जाएगा। ऐसे मामलों में आमतौर पर जो होता है मसलन मुठभेड़ में इस प्रकार के जघन्य अपराधी को निपटा दिया जाना। मकान पर बाबा का बुलडोजर का चलना। ऐसास कुछ नहीं होने जा रहा है। सचिन सिरोही ने बताया कि उन्होंने ये तमाम सवाल उठाए हैं। इस मैनेजमेंट में वो लगे थे जो खुद को सरधना का खुदा बताते हैं। ऐसे खुद तो तो ना खुदा होना अच्छा।