दुनिया पर एक और मुसीबत

kabir Sharma
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US की डेनमार्क व ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों से मिटिंग, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने ठुकराई अमेरिका की धमकी, ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे को अमादा

नई दिल्ली/न्यूयार्क। वेनेजुएला में अमेरिका की सशस्त्र हिमाकत और ईरान में चल रहे देश व्यापी प्रदर्शनों और एक हजार से ज्यादा मौत के साइड इफैक्ट से दुनियाअभी पूरी तरह से उबरी भी नहीं है कि नयी मुसीबत सिर पर मंड़रा रही है। यह मुसीबत ग्रीनलैंड को लेकर है, जिस पर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कब्जे की बात कही है। साथ ही यह भी कहा है कि भले ही कोई पसंद करे या ना करे ग्रीनलैंड पर कब्ज किया जाएगा। ग्रीनलैंड को डेनमार्क का स्वायत्त इलाका माना जाता है। इस मुद्दे पर आज वाशिंगटन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के साथ बैठक हो रही है। बताया गया है दोनों ही देशाें ने सैन्य कार्रवाई की धमकी की परवाह ना करते हुए ट्रंप की पेशकश को ठुकरा दिया है। हालांकि व्हाइट हाउस ने सैन्य बल प्रयोग को खारिज नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ट्रंप खरीदना चाहते हैं, न कि आक्रमण करना।

तनाव के मुहाने पर दुनिया

अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका सैन्य आधार विस्तार की अनुमति मांग सकता है, लेकिन ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होने की संभावना है। यह विवाद आर्कटिक में नए व्यापार मार्गों और जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलती बर्फ से जुड़ा है, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। अगर सैन्य बल का इस्तेमाल हुआ, तो नाटो में फूट पड़ सकती है।

धमकी के बाद तनाव के माहौल में बैठक

अमेरिका के राष्ट्रपति की धमकी के बाद गंभीर तनावपूर्ण माहौल में यह बैठक हो रही है। इसको पूरी दुनिया पर नयी मुसीबत का साया माना जा रहा है।ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, अपनी रणनीतिक स्थिति और खनिज संसाधनों के कारण अमेरिका की नजरों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद नाटो सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर सकता है और आर्कटिक क्षेत्र में नए संघर्ष को जन्म दे सकता है। दूसरी ओर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि सबसे कठिन दौर अभी बाकी है, लेकिन वे एकजुट रहेंगे: “हम साथ आएंगे, साथ रहेंगे और साथ जाएंगे।” ग्रीनलैंड के निवासियों ने अमेरिकी नियंत्रण का विरोध किया है। एक स्थानीय निवासी तुता मिकेलसेन ने कहा, “हम डेनमार्क के साथ खुश हैं, जहां हमें मुफ्त स्वास्थ्य, शिक्षा और पढ़ाई के लिए भुगतान मिलता है।”

ट्रंप दिखा रहे चीन रूस का खौफ

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया को चीन व रूस का खौफ दिखा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को खरीदने या जबरन कब्जा करने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक महत्वपूर्णता (आर्कटिक में छोटे व्यापार मार्ग, कंप्यूटर और फोन के लिए जरूरी खनिजों के भंडार) के कारण अमेरिका को इसे नियंत्रित करना चाहिए, अन्यथा रूस या चीन कब्जा कर लेंगे। लेकिन ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने इन धमकियों को खारिज कर दिया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसेन ने कहा, “अगर हमें अमेरिका और डेनमार्क में से चुनना पड़े, तो हम डेनमार्क चुनेंगे।” उन्होंने इसे “भू-राजनीतिक संकट” बताया।

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मिटिंग व्हाइट हाउस में

मीटिंग व्हाइट हाउस में हो रही है, जहां वैंस होस्ट कर रहे हैं। इसमें डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड्ट शामिल हैं। रुबियो भी मौजूद हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने रुबियो से बातचीत चाही थी, लेकिन वैंस ने खुद को शामिल किया और मीटिंग को होस्ट करने का फैसला लिया। अभी तक मीटिंग के नतीजों की कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि यह चल रही है। अपडेट्स के मुताबिक, डेनमार्क और ग्रीनलैंड एकजुट मोर्चा पेश कर रहे हैं। यूरोपीय संघ के प्रमुख देश डेनमार्क का समर्थन कर रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस की एक द्विदलीय टीम शुक्रवार और शनिवार को कोपेनहेगन जाकर डेनिश और ग्रीनलैंड नेताओं से मिलेगी, जो ट्रंप के प्रयासों का विरोध कर रही है।

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