ईरान से डरे हुए हैं ट्रंप

kabir Sharma
4 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

ईरान मिसाइलों के हमले की आशंका, कतर के अमेरिकी ऐयरबेस मे कम की फौजियों की संख्या, बड़ा सवाल पहले कौन कर सकता है हमला ईरान या अमेरिका

नई दिल्ली/तेहरान/वाशिंगटन। ईरान को छेड‍़कर अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शायद मुसीबत खरीद ली है। ट्रंप को दुनिया भर में जहां भी अमेरिकी खाासतौर से अमेरिकी फौजी या बेस हैं वहां ईरानी मिसाइलों के हमले का खौफ सता रहा है। कतर स्थित अमेरिकी बेस को खाली कराया जा रहा है। वहां से बड़ी संख्या में यूएस आर्मी के जवान निकाले गए हैं। केवल कुछ ही जवान वहां रख छोड़े हैं। इसके इतर दूसरी ओर ईरान के द्वारा इंडरनेट शटडाउन से भी यूएस में रह रहे ग्रोक को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। हालांकि दुनिया के कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप ईरान पर हमले की हिमाकत नहीं करेंगे। इसकी बड़ी वजह वेनेजुएला के मामले पर डोनाल्ड ट्रंप की कांग्रेस में हार बताया जा रहा है।

दो हजार से ज्यादा की मौतें

ईरान में अब देश व्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। हालांकि यह भी सच है कि जिस तेजी से देश भर में प्रदर्शन फैला उसी तेजी से खोमनी के वफादारों ने उसको कुचलने करा काम किया। जिसके चलते दो हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी अब तक मारे जा चुके हैं। यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रदर्शनों पर काबू पा लिया गया है, लेकिन प्रदर्शनों ने आयतुल्ला खोमनी की सरकार को बुरी तरह से हिला दिया है। ईरान का साफ कहना है कि इन प्रदर्शनों व प्रदर्शनकारियों की मौतों के पीछे CIA व MOSAD हैं। उन्होंने ईरानियों को गोलियां मारी हैं।

ईरान में executions नहीं

तेहरान ने दावा किया कि executions नहीं हो रही हैं, लेकिन तेज ट्रायल और सजा की बात कही गई है। देश का हवाई क्षेत्र लगभग सभी कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ट्रंप ने 14 जनवरी को कहा कि जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या रुक गई है और executions की योजना रोक दी गई है। उन्होंने सैन्य हस्तक्षेप को “स्विफ्ट और डिसाइसिव” बताया, लेकिन लंबे युद्ध से बचने पर जोर दिया।

अरब देश ट्रंप के साथ नहीं

तमाम अरब देश जिन्हें अमेरिका का मित्र माना जाता है उन्होंने दो टूक कह दिया है कि ट्रंप की ईरान पर एयर स्ट्राइक का वो समर्थन नहीं करेंगे। यह बात अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों को बता दी गयी हे। माना जा रहा है कि इसी वजह से कतर बेस से अमेरिका ने अपने काफी फौजी निकाल लिए हैं।

- Advertisement -

रजा पहलवी निशाने पर

ईरान के निर्वासित ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में विश्व भर में रैलियां हो रही हैं। यूएन और मानवाधिकार संगठन इंटरनेट बहाली और हिंसा रोकने की मांग कर रहे हैं। दुनिया के तमाम देश यह मान रहे हैं कि रजा पहलवी को अमेरिका एक बार फिर से ईरान में पदस्थ करना चाहता है ताकि एक तो उस पर ईरानी मिसाइलों का खतरा टल सके दूसरा यह कि गल्फ में एक और सैन्य ठिकाना बनाया जा सके, क्योंकि अफगानियों के द्वारा बगराम ऐयरबेस देने से साफ मना कर दिया गया है। अफगानियों की एक ही धमकी पर ट्रंप ने बैकफुट पर आने में देरी नहीं की।

WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *