देश भर में बसंत पंचमी की धूम

kabir Sharma
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श्रीधाम वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर की अलग छटा, देश के कई राज्यों में हो रहे हैं कार्यक्रम, मां सरस्वती की पूजा अर्चना

नई दिल्ली/वृंदावन। श्रीधाम वृंदावन समेत पूरे देश में बसंत पंचमी का पर्व परंपरागत श्रद्धा व उल्लास से मनाया जा रहा है। श्रीधाम वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में अलग ही छटा देखने को मिल रही है। इस मौके पर अनेक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। यह पर्व कला और ज्ञान का बोध कराता है। इसका धार्मिक महत्व भी है। इस मौके पर देश भर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देश के प्रख्यात युवा ज्योतिषी पंड़ित विवेक शर्मा (मेरठ के पीएल शर्मा रोड स्थित पंचमुखी अनुमान मंदिर के पुजारी) ने बताया कि बसंत पंचमी महोत्सव माता सरस्वती लौकिक वितरण इस प्रकार है- इस दिन बाबा बसंती चोला धारण करते हैं और चोला बाबा के भक्तों को बांटा जाता विद्यार्थियों के लिए शिक्षा में लाभ होता है। व्यापार करने वालों को व्यापार में प्रगति मिलती है। और यदि कोई किसी प्रोफेशन से जुड़ा है चाहे शिक्षक हो अधिवक्ता हो या डाक्टर हो तो उन्हें भी लाभ मिलता है। बाबा के इस चोले को एवं सरस्वती माता कि चांदी के लौकिट प्राप्त करने के लिए बसंत पंचमी के दिन शाम 5 बजे से प्रभु इच्छा तक रात्रि 10 बजे तक बाबा का चोला एवं सरस्वती मां का लॉकेट भक्तों को वितरण किया जाएगा। ये पर्व मां सरस्वती (विद्या, बुद्धि, संगीत, कला की देवी) को समर्पित है। बसंत ऋतु का आगमन सर्दी का अंत और फूलों-रंगों का मौसम शुरू होने का संदेश होता है।

माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी

बसंत पंचमी का उत्सव इस साल 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाय जा रहा है। माघ मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी सुबह 2:28 बजे से हो रही है और 24 जनवरी रात 1:46 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर मुख्य रूप से 23 जनवरी को ही पूजा-अर्चना हो रही है।

मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त

पूजा मुहूर्त: सुबह 7:13 AM से दोपहर 12:33 PM तक (लगभग 5 घंटे 20 मिनट) पर की जा सकती है। मध्याह्न काल में दोपहर 12:33 PM पूजा करें। कई जगहों पर बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो करियर, शिक्षा और नए कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन स्कूल-कॉलेजों में बच्चों की किताबें, वाद्ययंत्र और पेन-पेंसिल पूजा में रखे जाते हैं। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीले फूल (सरसों के), केसरिया भोग (हलवा, बेसन लड्डू, केला, चावल की खीर आदि) चढ़ाते हैं। पूजा विधि के लिए सरस्वती मंदिरों/घरों में मां की मूर्ति पर पीली साड़ी, सफेद फूल, वीणा, किताबें रखकर आरती, मंत्र जाप (“या कुन्देन्दु तुषारहार धवला…”) और भोग लगाया जाता है। सफेद/काला रंग न पहनें, पूजा में मांस-मदिरा से दूर रहें, किताबें उल्टी न रखें – ये मां को नाराज कर सकता है। देशभर में स्कूलों, मंदिरों (जैसे कोलकाता, पटना, दिल्ली के सरस्वती मंदिर) में विशेष आयोजन हो रहे हैं। लोग शुभकामनाएं और फोटो शेयर कर रहे हैं। कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन और सरसों के खेतों में फोटोशूट का दौर चल रहा है।

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