मुसलमानों के बगैर अधूरी है आजादी की गाथा

kabir Sharma
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पैसठ फीसदी शाहदत देने वाले मुसलमान, इतिहास में दर्ज है शाहदत की गाथाएं, अंग्रेज डरते ही हिन्दु मुसलमानों की एकता से थे

नई दिल्ली। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी गई आजादी की जंग की गाथा मुसलमानों के बगैर अधूरी है। आज भले ही मुसलमानों को लेकर कुछ भी कहा जा रहा हो, लेकिन यह भी सच है कि यदि आजादी की जंग में मुसलमान शरीक ना हुए होते तो आज भी हम अंग्रेजों की जूतियां सीधी कर रहे होते। लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज खुद मुसलमानों को अपने पूर्वजों की शाहदत से कुछ लेना देना नहीं लगता। वो यह जानना ही नहीं चाहते कि उनके पूर्वजों ने इस मुल्क के लिए कितने और कैसे-कैसे जुर्म सहे हैं। आज जब पूरी दुनिया और खासकर भारत में गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया जा रहा है तो यह जश्न मुसलमानों की शाहदत का जिक्र किए बगैर अधूरा ही रहेगा। इतिहास की मानें तो 1857 में ब्रिटिश हुकूमत में करीब तीस हजार उलेमाओं को तोप से उड़ा कर शहीद कर दिया था। और आज मुसलमानों से उनकी देश भक्ति के सबूत मांगे जाते हैं।

मुसलमानाें के खून के रंग के बगैर बेरंग

भारत की आजादी का असली रंग मुसलमानों के खून से रंगा है! ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के इंडिया गेट पर 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नामों में 65% मुसलमान थे। कालापानी की सेलुलर जेल में सबसे ज्यादा कैदी मुसलमान ही भेजे गए। लेकिन आज कुछ ताकतें – जो RSS-हिंदू महासभा के ‘गैर-भागीदारी’ को चमकाने में लगी हैं – मुसलमानों के योगदान को मिटाने पर तुले हैं। यह खबर उन ‘विरोधी इतिहासकारों’ को जवाब है जो कहते हैं कि मुसलमानों ने कुछ नहीं किया! संघियों और हिन्दू संगठनों की तमाम बैठकों में बताया जा रहा है कि मुसलमानों ने तो आजादी की जंग में कुछ किया ही नहीं वो तो केवल हिन्दुओं से लड़ रहे थे। यह बात वो कह रहे हैं जिनका आजादी की जंग से कोई सरोकार था ही नहीं।

शुरूआत ही मुसलमानों ने की,

इस मुल्क की आजादी की जंग में जिसको भी मुसलमानों की शाहदत पर कुछ शक ओ शुबा है उसको इतिहास के पन्ने पलट लेने चाहिए। 1857 से काफी पहले ही इस मुल्क के मौलवी और पंड़ितों ने आजादी की जंग शुरू कर दी थी। इसका जिक्र अंग्रेज इतिहासकारों ने भी किया है। साल 1857 में भारत के आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को हिंदू-मुस्लिम सेना ने अपना नेता बनाया। लखनऊ में बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों को भगा दिया, अवध की रानी बनीं। पीर अली खान लखनऊ के विद्रोह के नायक थे। हम कैसे टीपू सुलतान को भुला सकते हैं। इस मैसूर के ‘टाइगर’ ने रॉकेट तक बनाकर ब्रिटिश सेना को धूल चटा दी। 1799 में शहीद हुए, लेकिन उनकी जंग आजादी की मशाल जलाती रही।

ब्रिटिश डरते ही हिन्दू मुसलमानों की एकता से थे

ब्रिटिश हुकूमत केवल हिन्दु और मुसलमानों की एकता से डरते थी खौफ खाती थी। अशफाक उल्ला खां जिन्हें काकोरी कांड (1925) के शेर! राम प्रसाद बिस्मिल के साथ ट्रेन लूटी, फांसी पर हंसते हुए शहीद। हिंदू एकता का प्रतीक – “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा हसरत मोहानी ने दिया। खान अब्दुल गफ्फार खान यानि ‘फ्रंटियर गांधी’! पेशावर से 1 लाख खुदाई खिदमतगार बनाए, अहिंसा से ब्रिटिश को ललकारा। विभाजन के खिलाफ लड़े, पाकिस्तान ठुकराया। मौलाना अबुल कलाम आजाद: कांग्रेस के पहले अध्यक्ष! भारत छोड़ो आंदोलन के सूत्रधार, स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री। जेल में साल बिताए। मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली भाई: खिलाफत आंदोलन से असहयोग को ताकत दी। 1906 रेल हड़ताल में अबुल हुसैन जैसे मुसलमानों ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था लकवाग्रस्त कर दी। मदर बीवीम्मा: 30 लाख रुपये दान किए! नवाब ऑफ बिहार ने खजाना खाली कर दिया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (हुसैन अहमद मदनी), मजलिस-ए-अहरार, खुदाई खिदमतगार, ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस – ये मुस्लिम संगठन कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। एक अनुमान के तहत करीब 1 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों ने जान गंवाई! संगठनों की यदि बात की जाए तो ये आंकड़े साबित करते हैं कि आजादी हिंदू-मुस्लिम एकता की देन थी। लेकिन आज BJP-वादी इतिहास में RSS को हीरो बनाते हैं, जिन्होंने गांधी की हत्या की साजिश का आरोप है। नेहरू-आजाद की जोड़ी ने देश बचाया, जबकि जिन्ना जैसे विभाजनकारी अलग हो गए। सबसे बड़ा नाम उस मुसलमान जज का जिसने अंग्रेजों के कहने पर भगत सिंह के फांसी के फरमान पर साइन करने से मना कर दिया और नौकरी भी छोड़ दी।

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भूले-बिसरे नायकों की गाथा

भारत की स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसा महायुद्ध था जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मुसलमानों का योगदान इस लड़ाई की रीढ़ रहा – 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 की आजादी तक। लाखों मुस्लिमों ने जेलें काटीं, फांसी चढ़े, निर्वासन झेला और अपनी जान कुर्बान की। इतिहास गवाह है कि मुस्लिम नेता और क्रांतिकारी सबसे आगे थे, लेकिन आज कई नाम भुला दिए गए हैं।

1857 का महान विद्रोह: हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

1857 की क्रांति में मुस्लिम योगदान सबसे प्रमुख था। मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों ने भारत का सम्राट घोषित किया। बेगम हजरत महल ने अवध में अंग्रेजों के खिलाफ सेना खड़ी की और लखनऊ की रक्षा की। मौलवी अहमदुल्लाह शाह, आजिमुल्लाह खान जैसे योद्धाओं ने विद्रोह को नेतृत्व दिया। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक था, जिसने ब्रिटिशों की नींव हिला दी।

भारत की आजादी की जंग में मुसलमानों का अमिट योगदान: भूले-बिसरे नायकों की गाथा

भारत की स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसा महायुद्ध था जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मुसलमानों का योगदान इस लड़ाई की रीढ़ रहा – 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 की आजादी तक। लाखों मुस्लिमों ने जेलें काटीं, फांसी चढ़े, निर्वासन झेला और अपनी जान कुर्बान की। इतिहास गवाह है कि मुस्लिम नेता और क्रांतिकारी सबसे आगे थे, लेकिन आज कई नाम भुला दिए गए हैं। 857 की क्रांति में मुस्लिम योगदान सबसे प्रमुख था। मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों ने भारत का सम्राट घोषित किया। बेगम हजरत महल ने अवध में अंग्रेजों के खिलाफ सेना खड़ी की और लखनऊ की रक्षा की। मौलवी अहमदुल्लाह शाह, आजिमुल्लाह खान जैसे योद्धाओं ने विद्रोह को नेतृत्व दिया। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक था, जिसने ब्रिटिशों की नींव हिला दी।

File:South Malabar 1921.png - Wikimedia Commons
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खिलाफत आंदोलन और असहयोग: गांधीजी के साथ कदमताल

1919-1924 का खिलाफत आंदोलन मुस्लिमों द्वारा शुरू किया गया बड़ा आंदोलन था, जिसमें मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना शौकत अली और हकीम अजमल खान जैसे नेताओं ने नेतृत्व किया। गांधीजी ने इसे असहयोग आंदोलन से जोड़ा, जिससे स्वतंत्रता संग्राम को जन-जन तक पहुंच मिली। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का स्वर्णिम अध्याय था।

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प्रमुख मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी

  • मौलाना अबुल कलाम आजाद: कांग्रेस के प्रमुख नेता, सबसे कम उम्र के अध्यक्ष (1923 और 1940-46)। आजादी के बाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री। उन्होंने मुस्लिमों को अलगाववाद से दूर रखा और एकजुट भारत की वकालत की।
Maulana Abul Kalam Azad with Sir Usha Nath Sen and others - PICRYL ...
  • खान अब्दुल गफ्फार खान (फ्रंटियर गांधी): पश्तूनों के बीच अहिंसा का प्रचार किया। ‘खुदाई खिदमतगार’ सेना बनाई, जो गांधीजी की विचारधारा पर चलती थी। ब्रिटिशों ने उन्हें बार-बार जेल भेजा।
Gandhi and Abdul Gaffa Khan - PICRYL - Public Domain Media Search ...
  • अशफाकउल्ला खान: काकोरी कांड के क्रांतिकारी, रामप्रसाद बिस्मिल के साथी। 1927 में फांसी चढ़े।
  • डॉ. जाकिर हुसैन: शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी, बाद में भारत के राष्ट्रपति बने।
  • अबिद हसन सफरानी: सुभाष चंद्र बोस के साथ INA में, जिन्होंने “जय हिंद” का नारा दिया।
  • असफ अली और आरिफ अली: कांग्रेस के प्रमुख नेता, आरिफ ने “साइमन गो बैक” नारा दिया।
  • अन्य: मौलाना महमूद हसन (देवबंद), हकीम अजमल खान, मुहम्मद अली जिन्नाह (प्रारंभिक कांग्रेस नेता), बेगम हजरत महल आदि।

क्रांतिकारी और बलिदानी

कई मुस्लिम क्रांतिकारियों ने हथियार उठाए – जैसे भगत सिंह के साथ चंद्रशेखर आजाद के ग्रुप में शामिल योद्धा। INA में शाह नवाज खान, हबीबुर रहमान जैसे अधिकारी प्रमुख थे। लाखों मुस्लिमों ने नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया।

भारत की आजादी एक साझा संघर्ष था, जिसमें मुसलमानों का योगदान अनमोल है। आज जब हम गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो इन नायकों को याद करना जरूरी है – ताकि एकता की मिसाल कायम रहे

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