
मेरठ के अंतिम छोर व सराय काले खां तक रैपिड का इंतजार, तारीख पे तारीख और कुछ नहीं, वजह नहीं बता पा रहे अधिकारी
नई दिल्ली/मेरठ। मंडलायुक्त की नाराजगी और फटकार के बाद भी एनसीआरटीसी फिलहाल मेरठ वालों को अंतिम छोर तक रैपिड रेल की सुविधा देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। साल 2024 में अंतिम छोर यानि मोदीपुरम तक रैपिड रेल की सेवा दी जानी थी, लेकिन साल 2026 शुरू हो चुका है और अभी अंतिम स्टेशन तक रैपिड रेल के पहुंचने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है। मेरठ मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने हाल ही में एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण और समीक्षा बैठक की, जहां उन्होंने सख्त फटकार लगाई और तुरंत अंतिम खंड (मेरठ साउथ से मोदीपुरम/शताब्दीनगर तक) को चालू करने के निर्देश दिए। लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है – केवल हवाई दावे और बार-बार समयसीमा बढ़ाने की बातें हो रही हैं।
यह है स्टेटस
दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर 82 किमी लंबा है। फिलहाल न्यू अशोक नगर (दिल्ली) से मेरठ साउथ तक लगभग 55 किमी का हिस्सा यात्रियों के लिए खुला है, जिसमें 11 स्टेशन शामिल हैं। मेरठ साउथ से शताब्दीनगर, बेगमपुल और मोदीपुरम तक का अंतिम 27 किमी खंड (मेरठ शहर के अंतिम छोर तक) अभी भी पूरी तरह परिचालन में नहीं आया। सिविल वर्क, ट्रायल रन और टेस्टिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन औपचारिक उद्घाटन का इंतजार है, जिसके कारण देरी हो रही है। इसको लेकर नित नए बहाने बाजी सामने आती है।
ये थे दावे
रैपिड रेल को मेरठ के अंतिम छोर तक चलाने के दावे की बात की जाए तो साल 2024 में इसको चलाया जाना था। इसमें सराय काले खां स्टेशन भी शामिल था, लेकिन वो भी नहीं हो सका। गैर अधिकृत सूत्रों की मानें तो रैपिड हो सकता है कि साल 2027 तक ही मेरठ के अंतिम छोर तक पहुंच सके। यदि वाकई ऐसा होता है तो यह मेरठ वालों के साथ बहुत बड़ी ठगी होगी।
मंडलायुक्त की नाराजी और फटकार
मंडलायुक्त भानु गोस्वामी ने हाल के निरीक्षण में एनसीआरटीसी टीम को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि शहर के अंतिम छोर तक रैपिड रेल न पहुंच पाने से मेरठवासियों को रोजाना परेशानी हो रही है – ट्रैफिक जाम, समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान। उन्होंने तुरंत सुरक्षा जांच पूरी कर सेवा शुरू करने के आदेश दिए, लेकिन एनसीआरटीसी की ओर से सिर्फ “जल्द ही” और “तैयारियां चल रही हैं” जैसे बयान आ रहे हैं। कोई ठोस तारीख नहीं बताई जा रही।
यात्रियों की मुसीबत
मेरठ के मोदीपुरम, शताब्दीनगर जैसे इलाकों के लोग अभी भी बस, ऑटो या निजी वाहनों पर निर्भर हैं। दिल्ली-मेरठ सफर में 45-55 मिनट का वादा था, लेकिन अंतिम छोर न होने से पूरा फायदा नहीं मिल रहा। लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर काम चल रहा है, लेकिन मुख्य रूट अधूरा होने से इसका लाभ सीमित है। जनता सवाल उठा रही है – जब ट्रायल रन सफल हो चुके हैं और काम पूरा है, तो फिर औपचारिक उद्घाटन का इंतजार क्यों? क्या राजनीतिक कारण हैं या प्रशासनिक लापरवाही? दावा है कि अंतिम खंड जल्द चालू होगा, लेकिन पिछले अनुभवों से यकीन कम है। मंडलायुक्त की फटकार के बाद अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मेरठ की विकास यात्रा में यह एक बड़ा धब्बा बनेगा। लोगों की मांग है – अब हवाई दावे बंद हों, असली रैपिड रेल अंतिम छोर तक दौड़े!