बरामती इलाके में प्लेन हुआ क्रेश, अजीत के अलावा और चार की मौत, महाराष्ट्र के “क्राइसिस मैनेजर”, विपक्ष की नजरों में “सत्ता लोभी” “गद्दार”
नई दिल्ली/मुंबई/बारामती। महाराष्ट्र की राजनीति के कदावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले अजीत पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। सत्ता के गलियारों में हमेशा अजेय माने जाने वाले अजीत अनंतराव पवार की आज बारामती में प्राइवेट लियरजेट-45 क्रैश में दर्दनाक मौत हो गयी। इस हादसे में विमान का पायलट, को-पायलट, फ्लाइट अटेंडेंट और पीएसओ समेत कुल 5 लोग मारे गए। कोई जिंदा नहीं बचा। सत्ता की खातिर अजीत पवार अपने सगे चाचा शरद पवार जिन्होंने उन्हें राजनीति का कहकरा सिखाया उनसे भी साइड लाइन होने में गुरेज नहीं की। महराष्ट्र के बरामती का किला जिसे कोई नहीं हिला सका, आज उसी बारामती में उनका अंतिम सफर शुरू हुआ। अजित पवार को महाराष्ट्र का “क्राइसिस मैनेजर” कहा जाता था। विकास पुरुष, किसानों के मसीहा, लेकिन विपक्ष उन्हें “सत्ता लोभी” और “गद्दार” कहता रहा।
ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर
22 जुलाई साल 1959 में जन्में शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने महज तेइस साल की उम्र में को-ऑपरेटिव शुगर मिल के चेयरमैन बनकर दुनिया को बता दिया था कि उनकी महत्वाकांक्षाएं कितनी ऊंची हैं। साल 1991 में वह पहली बार बारामती से लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद लगातार 7 बार बारामती से विधायक कोई नहीं हरा सका! साल 2004-2014 तक सबसे लंबा कार्यकाल बतौर सरकार में शामिल होने का। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के समय 4 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। सिंचाई घोटाले के आरोप लगे, इस्तीफा दिया, लेकिन फिर वापस सत्ता के सिंहासन पर पहुंच गए। हादसे में मौत से चंद घंटे पहले तक करते रहे चुनाव प्रचार।
चाचा शरद पवार से बगावत
साल 2023 में चाचा शरद पवार के साथ बगावत कर भाजपा-शिंदे से हाथ मिलाकर सरकार में शामिल हाे गए। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुती की भारी जीत, देवेंद्र फडणवीस के साथ फिर डिप्टी सीएम बने। साल 2025 में अपने भतीजे यतिन पवार को बारामती में बुरी तरह हराया – ये उनकी आखिरी चुनावी जीत थी। अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति में “पावर” का पर्याय बने रहे—सत्ता से कभी दूर नहीं हुए, चाचा की छाया से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाई, लेकिन उनका सफर अचानक और दुखद रूप से थम गया।