बजट से पहले तमाम निवेशक बर्बाद, केंद्रीय बजट एक फरवरी को, 15 मिनट में निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए
नई दिल्ली। इसे सरकार खाासतौर से वित्त मंत्री की गलत नीतियां कहें या कुछ और बाजार में निवेशकों को चार लाख करोड़ डूब गए। इतनी बड़ी गिरावट से कई निवेशक तो पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। बाजार जितना अनसरटेन अब है पहले ऐसा नहीं होता था। भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बजट 2026 (1 फरवरी को पेश होने वाला) से पहले मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के सत्रों में निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई है। यह गिरावट 2026 की शुरुआत में बाजार की कमजोरी दिखाती है, जहां वैश्विक और घरेलू कारकों का मिश्रण निवेशकों को सतर्क कर रहा है।
ये हुआ 30 जनवरी को
इस बड़े झटके की यदि बात करे तो शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600+ अंक (0.75%+) गिरकर 81,941 के निचले स्तर पर पहुंचा। निफ्टी 194+ अंक गिरकर 25,224 पर आया। सिर्फ 15 मिनट में निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बीएसई मार्केट कैप घटकर 455.73 लाख करोड़ रुपये रह गया। दिन के अंत में गिरावट थोड़ी कम हुई, लेकिन सेंसेक्स 296 अंक और निफ्टी 98 अंक नीचे बंद हुआ।
तीन से चार लाख करोड़ का फटका
बाजार में दो दिन यानि 29 और 30 जनवरी को एक सत्र में 3-4 लाख करोड़ का नुकसान निवेशकों का हुआ है और यदि पूरे सप्ताह की बात करें तो 16 लाख करोड़+ का निवेशक धन गायब (कुछ रिपोर्ट्स में Nifty/Sensex 2.5%+ गिरावट)। पूरे जनवरी माह की यदि बात करें तो जनवरी में कुल मिलाकर 15-16 लाख करोड़ तक का फटका लगा है। (शुरुआती 20 दिनों में ही 15 लाख करोड़ का अनुमान)। जार में FII ने जनवरी में 43,000 करोड़+ की बिकवाली की। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कच्चा तेल महंगा, और बजट से पहले सतर्कता बढ़ी। यह 2021 के बाद जनवरी में सबसे खराब प्रदर्शन है।
बजट को लेकर डरे है निवेशक
बाजार में आए इस भूचाल के पीछे माना जा रहा है कि निवेशक बजट को लेकर बुरी तरह से डरे हुए हैं। इसी के चलते मुनाफा वसूली में एकाएक तेजी आ गयी। इसके अलावा जनवरी में अरबों डॉलर की निकासी (2025 में रिकॉर्ड 19 बिलियन डॉलर बिकवाली के बाद जारी)। अमेरिका-ईरान तनाव, ट्रंप की टैरिफ नीतियां, यूएस डॉलर मजबूत, और एशियाई बाजारों में अस्थिरता भी एक बड़ा कारण। मोदी सरकार रुपए का गिरना नहीं रोक पा रही है। रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल। निवेशक अब बजट पर नजर टिकाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में अगर टैक्स राहत, इंफ्रा खर्च या कॉर्पोरेट सपोर्ट मिला तो रिकवरी हो सकती है, वरना गिरावट जारी रह सकती है। हालांकि, घरेलू निवेशक (DII) खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिल रहा है।