योगी के अफसरों को शंकराचार्य का इंतजार

kabir Sharma
3 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

अफसर चाहते हैं कि शंकराचार्य प्रयागराज लौटें, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का इंकार, कई संत व शंकराचार्य भी आए समर्थन में

नई दिल्ली/प्रयागराज।माघ मेले के दौरान जो कुछ हुआ उसका डेमेज कंट्रोल करने के लिए 1 फरवरी को योगी सरकार के बड़े अफसरों को शंकराचार्य के प्रयागराज लौटने का इंतजार है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी की माने तो अफसरों ने संदेश भेजा है कि जो कुछ माघ मेले में 18 फरवरी को हुआ उसकी माफी मांगने तथा पुष्प वर्षा कर स्नान को तैयार हैं, लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इसके लिए तैयार नहीं। शंकराचार्य ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम योगी को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश में गौमांस निर्यात पूरी तरह बंद किया जाए और गाय को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिया जाए। अगर 10 मार्च तक ये मांगें नहीं मानी गईं, तो 10-11 मार्च को लखनऊ में धर्म संसद बुलाई जाएगी, जहां संत समाज तय करेगा कि “कौन असली हिंदू है और कौन नकली”। शंकराचार्य ने कहा, “सफेद वस्त्र पहनकर हिंदू होने का दावा नहीं चलता, गो-रक्षा असली प्रमाण है।”

यह हुआ था।

प्रयागराज के माघ मेले 2026 में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश प्रशासन के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर और गहरा गया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को संगम में पवित्र स्नान के दौरान शंकराचार्य की पालकी को रोके जाने, उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट और ‘शंकराचार्य’ पद का प्रमाण मांगने से शुरू हुआ यह मामला अब योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा हमला बन चुका है।

कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार के अफसरों की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। मारपीट प्रकरण में अब प्रयागराज कोर्ट ने छ फरवरी तक अफसरों से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन मे आने वाले शंकरचार्य व संतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह योगी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। द्वारका शंकराचार्य ने प्रशासन को अहंकारी बताया, जबकि कुछ अन्य ने अविमुक्तेश्वरानंद पर अन्याय का आरोप लगाया। उमा भारती ने प्रशासन के प्रमाण मांगने को ‘मर्यादा उल्लंघन’ बताया।

विपक्षी दल शंकराचार्य के साथ

केवल संत व शंकराचार्य ही नहीं विपक्षी दल भी शंकराचार्य के साथ आ गए हैं। कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर ‘सनातन का अपमान’ का आरोप लगाया। सपा नेता एसटी हसन ने कहा, “हम शंकराचार्य के साथ हैं।” कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सीएम योगी पर हमलावर हैं। वहीं दूसरी ओर यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि असली vs नकली हिंदू की बहस में बदल गया है। माघ पूर्णिमा पर क्या शंकराचार्य प्रयागराज लौटते हैं या नहीं, यह देखना बाकी है। आने वाले दिनों में लखनऊ की धर्म संसद बड़ा ट्विस्ट ला सकती है।

- Advertisement -

WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *