पैसा आए कहां से पैसा जाए कहां रे

kabir Sharma
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वित्त मंत्री सीतारमण ने पेश किया बजट, 9वां बजट पेश कर बनाया रिकार्ड, पीएम मोदी ने की सराहना, विपक्ष ने बताया गरीबों के लिए कुछ नहीं

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में 9 वां यूनियन बजट पेश किया। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि बजट ‘विकसित भारत’ की थीम पर आधारित है, जिसमें आर्थिक विकास, इनक्लूसिव ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं पर जोर दिया गया है। बजट को लेकर सत्ताधारी दलों व विपक्ष की मिश्रित प्रतिक्रियांए आयी हैं। बजट में कई राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देश में रोग‑भार (Disease Burden) लगातार Non‑Communicable Diseases (NCDs) की तरफ बढ़ रहा है, जैसे डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग, किडनी और लिवर संबंधित रोग। इसी वजह से सरकार का पूरा फोकस रोकथाम, स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज पर होगा, ताकि इन बीमारियों से निपटने की क्षमता मजबूत की जा सके। बैंकिंग क्षेत्रों की व्‍यापक समीक्षा के लिए विकसित भारत के बैंकिंग क्षेत्र में उच्‍च स्‍तरीय समिति का गठन किया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र NBFC में क्षमता संवर्धन और दक्षता प्राप्‍त करने के लिए पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम को पुर्नगठित किया जाएगा।

बजट में नहीं कोई पॉलटिकल मैसेज

बजट में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश नहीं है, लेकिन इसमें मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग-टर्म स्थिरता पर फोकस है। कुल व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है, जो पिछले साल से 9% अधिक है। बजट ‘विकसित भारत’ की थीम पर आधारित है, जिसमें आर्थिक विकास, इनक्लूसिव ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं पर जोर दिया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, FY26 में GDP ग्रोथ 7.4% और FY27 में 6.8-7.2% रहने का अनुमान है।

राहत नहीं आयकर दाता निराश

बजट में आयकर में कोई राहत नहीं मिली है। इससे आयकर दाता निराश हैं। लेकिन मिडिल क्लास के लिए राहत जैसे TCS में कटौती, नया डिविडेंड डिडक्शन, ITR करेक्शन विंडो मार्च 31 तक बढ़ाई गई। लेकिन पब्लिक कैपेक्स को ₹12.2 ट्रिलियन तक बढ़ाया गया। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड, डेडिकेटेड REITs रियल एस्टेट एसेट्स के लिए, कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम (इनलैंड वॉटरवेज और कोस्टल शिपिंग का शेयर 6% से 12% तक बढ़ाने का लक्ष्य)। शहरों के लिए ₹5000 करोड़ प्रति सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) आवंटन का प्रावधान किया है।

क्या महंगा क्या सस्ता

जब भी यूनियन बजट आता है तो सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाता है कि क्या महंगा और क्या सस्ता हुआ है। स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, लेदर गुड्स, कैंसर दवाएं (17 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट), सीफूड सस्ते होंगे। स्मार्टफोन, अल्कोहल, टोबैको, माइक्रोवेव, ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा बजट में धन-धान्य कृषि योजना हाई-यील्ड फसलों के लिए। बायोफार्मा ग्रोथ के लिए ₹100 अरब का प्रावधान किया गया है।

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इनकी नजरों में बजट

पीएम मोदी ने बजट को देश के लिए ‘महत्वाकांक्षी’ बताया और कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं को संबोधित करता है। नीति आयोग CEO BVR सुब्रह्मण्यम ने बजट को ‘सर्विसेज बजट’ करार दिया है। बजट में सेवाओं-आधारित ग्रोथ, रेगुलेटरी रिफॉर्म्स और प्राइवेट सेक्टर इनवेस्टमेंट पर जोर है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘टोटली लैकलस्टर’ कहा, मुख्य योजनाओं के आवंटन में पारदर्शिता की कमी। शशि थरूर ने मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास और राज्यों के लिए कुछ नहीं होने पर निराशा जताई। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी बजट से निराश हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल को एक पैसा नहीं मिला है। बजट को बंगाल के लिए निराशा जनक बताया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने बजट को गरीबों के लिए समझ से परे, शिक्षा और रोजगार पर फोकस नहीं।

फेंकू और लपेटू बजट

सिनेमा से राजनीति में आए शत्रुघन सिन्हा ने बजट को फेंकू और लपेटू’ बजट, रोजगार, कर्ज और किसानों के लिए कुछ नहीं। लेकिन मिडिल क्लास और ऊपरी जातियों की चिंताओं (जैसे UGC गाइडलाइंस) पर सीधा फोकस नहीं। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि बजट में राज्यों का हिस्सा 41% रखने पर निराशा, फिस्कल जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव ने कहा कि बजट में किसान, गांव और खेती का नाम तक नहीं, राजनीतिक घोषणा। बजट को उन्होंने मिडिल क्लास, किसानों और राज्यों की अनदेखी करने वाला बताया।

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