क्या रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा भारत, पांच सौ अरब डालर का सामान खरीदेगा भारत, क्या एक बार फिर रूस चीन के खेमे से दूरी बनाएगा भारत
नई दिल्ली/न्यूयार्क। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप या फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दोनों में से किस पर यकीन किया जाना चाहिए, क्योंकि रूस से तेल खरीद के मामले में जो दावा ट्रंप कर रहे हैं उसको लेकर भारत के पीएम मोदी चुप हैं। मसला केवल भारत का रूस से तेल ना खरीदने तक ही सीमित नहीं है, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इससे भी बड़ा और चौंकाने वाला दावा कर डाला है। उनकी ओर से दावा किया गया है कि भारत करीब पांच सौ अरब डालर का रूसी सामान खरीदेगा। अमेरिका ने भले ही यह दावा किया हो, लेकिन अमेरिका के भारत पर 18 फीसदी टैरिफ के एलान के बाद भारत की ओर से खासकर पीएम मोदी की ओर से दी गयी प्रतिक्रिया में ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है। जिसके बाद दुनिया के तमाम कुटनीतिज्ञ जो कुछ ट्रंप दावा कर रहे हैं और जितना संतुलित पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा है उससे तमाम बातों और दावों पर संदेह की पर्याप्त गुंजाइश है।
कितना यकीन किया जाए ट्रंप का
अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप की जहां तक बात है तो उनके दावों और बातों का कितना यकीन किया जाए खासतौर से भारत के संदर्भ में। इसको लेकर भारतीयों खासकर जो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कनेक्ट हैं वो बार-बार कहते हैं कि ट्रंप भरोसे लायक नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रंप ने भारत से पहले यह दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध रूकवा दिया है। हालांकि इस प्रकार के दावे कई दूसरे देशों ने भी किए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध रूकवाने की बात भारत से पहले ट्रंप ने कही। इसके अलावा भी भारत को लेकर कई दूसरे मुद्दों पर अमेरिका के प्रेसीडेंट के जरिये भारत के संदर्भ की दुनिया को जानकारी मिली।
अमेरिका को लेकर भारत का तर्जुबा
अमेरिका को लेकर भारत का तर्जुबा बहुत अच्छा नहीं रहा है। बात बहुत ज्यादा पुरानी नहीं है जब अमेरिका से दुत्कारे जाने पर भारत को चीन और रूस के नजदीक देखा जाने लगा था। विश्व पटल पर यह बात प्रमाणित रूप से कही जाने लगी थी कि भारत अपने परंपरागत मित्र रूस और परंपरागत शत्रु चीन के ज्यादा करीब हो गया है। अब सवाल उठ रहा है कि ट्रंप के एलान के बाद क्या भारत को रूस और चीन के संदर्भ में कुछ हाशिये पर मान लिया जाना चाहिए। क्या वाकई रूस से भारत तेल की खरीद बंद कर देगा। क्योंकि अमेरिका की नजरों में रूस से तेल का खरीदा जाना भारत युद्ध फंडर है। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि भारत का रूस से तेल खरीदना युक्रेन युद्ध समाप्त करने में बड़ी बाधा है।