सीईओ कैंट के निर्देश पर चलाया गया था अभियान, गांव देहात में पहुंचा दी थीं डेयरियां, बोर्ड अध्यक्ष जता चुके हैं नाराजगी, करोड़ों कीमत सरकारी जमीनों पर कब्जा
मेरठ। लालकुर्ती बाउंड्री रोड पर जहां बड़ा अभियान चलाकर कैंट बोर्ड ने पशु डेयरी हटवा कर सरकारी जमीन मुक्त कराकर उस पर कब्जा ले लिया था, वहां दोबार से डेयरी आबाद कर ली गयी है। केवल इस जगह पर ही नहीं पूरे कैंट इलाके में जहां-जहां भी डेयरियां हटायी गयी थीं उनमें से ज्यादातर स्थानों पर डेयरियां लौट आयी हैं। इन डेयरियों के छुट्टा पशुओं को लेकर कैट बोर्ड अध्यक्ष अपनी नाराजगी भी जता चुके हैं, लेकिन उनकी नाराजगी के बाद भी छावनी में रहने वालों को ना तो डेयरियों की समस्याओं से निजात मिल पा रही है और ना ही छुट्टा पशुओं की समस्या से छुटकारा
सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे
कैंट की तमाम डेयरियां सरकारी जमीनों पर कब्जे कर संचालित की जा रही हैं। जिन डेयरियों को आबादी के बीच से हटा कर सरकारी जगह मुक्त करायी गयी थी, वो डेयरियां ना केवल दोबारा लौट आयी हैं बल्कि फिर से सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। ऐसा नहीं कि कैंट के रेवेन्यू सेक्शन को इसकी जानकारी नहीं। लोगों की मानें तो रेवेन्यू सेक्शन को इसकी जानकारी भी है और रेवेन्यू का स्टाफ बार-बार डेयरी संचालकों से मिल भी रहा है ताकि सरकारी जमीन पर कब्जा कर दोबारा आबाद की गयी डेयरी को हटाया जा सके, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहाहै। इसके चलते छावनी इलाके से कैंट बोर्ड के आबादी के बीच अवैध रूप से संचालित की जा रही डेयरियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए अभियान पर सवालिया निशान लग गया है। पूर्व में जहां-जहां भी कैंट बोर्ड ने जो डेयरियां हटाईं और वहां दीवारें खड़ी की थीं वहां अब डेयरियां वापस लौट आई हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कैंट बोर्ड के अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इन डेयरियों के पशुओं से ना केवल सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण किया जा रहा हैं, बल्कि आवारा पशुओं की समस्या को भी बढ़ावा दे रही हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। लालकुर्ती बूचरी रोड पर तसलीम की डेयरी का मामला ऐसा ही मामला है। उसने भी सरकारी जमीन पर कब्जा कर डेयरी आबाद कर ली है।
कौन दे रहा है संरक्षण
जो पशु डेयरियां लौट रही हैं और इन डेयरियों के संचाकों ने जो सरकारी जमीन मुक्त कर वहां पर दीवार बना दी थी, कुछ स्थानों पर उस दीवार को भी गिराकर दोबारा से सरकारी करोडों रुपए कीमत की जमीन पर कब्जे के प्रयास हो रहे हैं इसके लिए जिम्मेदार कौन है। सूत्रों की मानें तो इसके पीछे इलाके कुछ भाजपाई नेता हैं जिनके इशारे पर ही ये डेयरियां लौटनी शुरू हो गयी हैं। बताया जाता है कि इलाके के इन भाजपा नेताओं के संगठन के बड़े नेताओं से संपर्क हैं, उनके बूते ही ये लोग सेटिंग गेटिंग कर इन डेयरियों को दोबारा से आबाद करा रहे हैं।
गांव देहात पहुंचा दी गयी थीं डेयरियां
कैंट बोर्ड ने अवैध डेयरियों के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया था। मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) जाकिर हुसैन के निर्देश पर रेवेन्यू सेक्शन की टीम ने डेयरियों के खिलाफ सघन अभियान चलाया था। सख्ती के चलते डेयरी संचालक अपने पशुओं को ट्रकों में भरकर गांव देहात के इलाके में ले गए। वहीं उन्होंने कारोबार भी जमा लिया था। वहीं दूसरी ओर कैंट बोर्ड ने जो सरकारी जमीन डेयरियों से मुक्त करायी थी वहां पार्क बना दिए गए थे। कुछ जगह दीवारें खड़ी कर दी गयी थीं। लेकिन अब कुछ समय से इन्हीं जगहों पर पशु फिर से रखे जा रहे हैं। घोसी मोहल्ला जैसे इलाकों में तो सबमर्सिबल पंप तक जब्त किए गए थे। ये डेयरियां दोबारा वापस आ गई हैं। आबूलेन पर होटल चलाने वाले एक शख्स ने बताया कि ‘कैंट बोर्ड ने बड़े-बड़े वादे किए थे, अफसरों की लापरवाही से ये डेयरियां लौट आईं। सड़कें तंग हो गई हैं। दूध दोहने के बाद डेयरियों के पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है। जो इधर-उधर भटकते हैं। लोगों का आरोप है कि बगैर सेटिंग के डेयरियों की वापसी मुमकिन नहीं।
अफसरों की अनभिज्ञता पर सवाल
कैंट बोर्ड के अफसरों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘अभियान जारी है, लेकिन मानव संसाधन की कमी से निगरानी मुश्किल हो रही है। बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन ने मई में ही कहा था कि ‘डेयरियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।Ó सवाल यह उठता है कि आखिर हटाई गई डेयरियां कैसे लौट आईं और अफसरों को कैसे पता नहीं चला? क्या यह प्रशासनिक नाकामी का मामला है या कुछ और।
यह कहना है रेवेन्यू हैड का
कैंट बोर्ड के रेवेन्यू हेड हितेष कुमार का कहना है कि पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है। उसके खिलाफ अब बड़ी कार्रवाई की जाएगी।