गायब होने वालों में बड़ी संख्या नाबालिग लड़कियों की, पुलिस नहीं लगा पा रही है सुराग, इस साल अब तक 8 सौ से ज्यादा गायब
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीएम एक महिला होने के बावजूद दिल्ली महिलाओं खासतौर से नाबालिग बच्चियों के लिए अब सुरक्षित नहीं रह गयी है। उनके लिए बेहद खतरे की जगह बन गयी है। साल 2026 में पहले करीब पंद्रह दिनों में देश की राजधानी से आठ से ज्यादा गायब हो चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की भी है। इस तरह के आरोप किसी विपक्षी दल ने नहीं बल्कि दिल्ली की महिला सीएम रेखा गुप्ता की पुलिस के आंकड़े ये बात चीख-चींख कर कह रहे हैं। पुलिसिया आंकड़ों की मानें तो जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों (1 से 15 जनवरी) में ही 807 लोग लापता हो गए। यानी औसतन हर दिन 54 लोग गायब हो रहे हैं। इनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां (करीब दो-तिहाई) शामिल हैं, जबकि 298 पुरुष। नाबालिगों के 191 मामले दर्ज हुए, जिनमें 146 लड़कियां हैं।
बेटियों के परिवार दहशत में
दिल्ली पुलिस के इन आंकड़ों के मीडिया की मार्फत सामने आने के बाद दिल्ली वो परिवार दहशत में हैं जिनमें नाबालिग बेटियां हैं। गायब होने वालों की यदि बात की जाए तो पुलिसिया आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल 2025 में कुल 24,508 लापता मामले दर्ज हुए थे, जिनमें महिलाओं की संख्या 14,870 (60% से ज्यादा) थी। दशक (2016-2026) में कुल 2,32,737 लापता मामले, जिनमें से करीब 52,000 अभी अनसुलझे हैं। यह संख्या “रहस्यमय” और “अचानक” गायब होने के रूप में वर्णित है, जिससे परिवारों में दहशत है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग, घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य या शहर की असुरक्षा का नतीजा है।
दिल्ली पुलिस के कार्रबाई के दावे
मामला मीडिया में आने के बाद दिल्ली पुलिस के अफसर अब कार्रवाई के दावे कर रहे हैं। बताया गया है कि इन मामलों पर तुरंत कार्रवाई शुरू की है – CCTV, मोबाइल लोकेशन और पड़ोसी राज्यों से कोऑर्डिनेशन के जरिए। ऑपरेशन मिलाप जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पुलिस पर दबाव है। महिलाओं-बच्चों के मामले गंभीर हैं। यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि हजारों परिवारों का दर्द हैं। दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।