नहीं थम रहा एपस्टीन का तूफान

kabir Sharma
4 Min Read
WhatsApp Channel Join Now

एपस्टीन के साथ नाम आना ही बुरा है, भाजपा व सरकार की सफाई ना काफी, सुब्रह्मणय स्वामी के खुलासों से भाजपा असहज

नई दिल्ली/न्यूयार्क। सेक्स के लिए नाबालिक मासूम बच्चियों के सप्लायर के साथ नाम का जुड़ा भी किसी गुनाह से कम नहीं। पंड़ित नेहरू का नाम आइटीन के साथ जुड़ता था और पीएम मोदी नाम एपस्टीन के साथ। भाजपा या अंध भक्त भले ही कुछ भी सफाई देते रहें, लेकिन भाजपा नेता सुब्रहमण स्वामी के कई खुलासों ने भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। विपक्षी पार्टियां, खासकर कांग्रेस, ने इसे “बेहद शर्मनाक” करार दिया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि एपस्टीन के ईमेल से पता चलता है कि मोदी ने जून 2017 में अमेरिका में एपस्टीन से सलाह ली और इजराइल में “नाच-गाना” किया। उन्होंने मांग की है कि मोदी इस कनेक्शन पर सफाई दें। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स इसे हालिया यूएस-इंडिया ट्रेड डील से जोड़ रहे हैं। एक पोस्ट में कहा गया: “एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के डर से मोदी ने ट्रेड डील में सरेंडर कर दिया।” अन्य पोस्ट्स में इसे “मोदी है तो मुमकिन है” कहकर व्यंग्य किया गया है।

भारत में मचा है तूफान

एपस्टीन के खुलासों ने भारत में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा नेता सुब्रह्मण स्वामी इसमें घी डालने का काम कर रहे हैं। एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा है “भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने मेरी सलाह ली और इजराइल में अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए नाच-गाना किया। वे कुछ हफ्ते पहले मिले थे… यह काम कर गया!” यह मोदी के जुलाई 2017 के इजराइल दौरे का संदर्भ लगता है, जो किसी भारतीय पीएम का पहला ऐसा दौरा था। एक अन्य मैसेज में, एपस्टीन ने अनिल अंबानी के साथ बातचीत में मोदी की इजराइल रणनीति और ट्रंप प्रशासन से कनेक्ट करने की चर्चा की है। अंबानी, जो मोदी के करीबी माने जाते हैं, ने एपस्टीन से जारेड कुश्नर और स्टीव बैन्नन जैसे ट्रंप के करीबियों से संपर्क करने में मदद मांगी थी।

सफाई ना काफी

सरकार और भाजपा नेता भले ही कुछ भी सफाई दें, लेकिन सेक्स के लिए नाबालिग बेहद कम उम्र की लड़कियों से कनेक्शन ही सभ्य समाज में हिकारत की नजर से देखा जाता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन खुलासों को “एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं” बताकर खारिज कर दिया है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि मोदी का इजराइल दौरा आधिकारिक था और बाकी दावे अवमानना के योग्य हैं।

तो क्या डील के पीछे एपस्टीन का हंगामा

ट्रेड डील के संदर्भ में, विपक्ष का आरोप है कि यह डील एपस्टीन फाइल्स को दबाने के लिए की गई है, लेकिन सरकार ने इसे खारिज किया है। एपस्टीन फाइल्स की नवीनतम बैच से हैं, जिसमें ट्रंप, क्लिंटन, मस्क जैसे नाम भी शामिल हैं। मोदी का नाम अप्रत्यक्ष रूप से आया है, भारत में यह मोदी सरकार की मुसीबत बन गया है। इतनी ज्यादा मुसीबत कि लोकसभा में आने से भी बचते रहे।

- Advertisement -

WhatsApp Channel Join Now
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *