सब्जी मंड़ी की फड़ों का सौदा एक करोड़ी, क्यों नहीं लगी बोर्ड को भनक, बोर्ड अफसरों को बीस लाख की चर्चा, दबाई जा रही थी शिकायतें
मेरठ। सदर सब्जी मंड़ी में आवंटित फड़ों पर लगाए गए शटर गुरूवार को कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन की टीम ने कार्रवाई कर उखाड़ दिए हैं। एक दिन पहले यानि बुधवार को दुकानों के आगे लगाए गए शेड उखाड़ दिए गए थे। जिस वक्त कार्रवाई की जा रही थी बड़ी संख्या में आसपास के दुकानदार जमा हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक साल पहले से कैंट बोर्ड द्वारा फड़ों पर शटर लगाए जाने का काम चल रहा था। शटर लगकर तैयार फड़ों को दुकानों में बदल भी दिया गया था। सुनने में तो यहां तक आया कि इन सभी फड़ों को दुकान बनाकर बेचे जाने का सौदा एक करोड़ में किया गया। यह बात अलग है कि मामला सीईओ कैंट जाकिर हुसैन तक पहुंचने के बाद बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन को कार्रवाई करनी पड़ गयी और फड़ों को दुकान बनाकर एक करोड़ में बेचने के मंसूबों पर पानी भी फिर गया।
बोर्ड में किसकी जेब में पहुंचे बीस लाख
रेवेन्यू सेक्शन का स्टाफ जब कार्रवाई कर रहा था उस वक्त तमाम लोग ऐसे भी थे जो आपसी बातचीत में बता रहे थे कि बोर्ड में बीस लाख देने के बाद भी फड़ों को दुकान बनाकर एक करोड़ में बेचे जाने के मंसूबे पर पानी फिर गया, यदि बीस लाख पकड़े जाने की बात वाकई सच या सही है तो फिर सवाल तो पूछा जाएगा कि बीस लाख रुपए कैंट बोर्ड ने किसने पकड़े और जब पकड़े ही थे तो फिर काम की क्या गारंटी नहीं दी गयी थी, क्योंकि यदि काम की गारंटी दी गयी होती तो फिर फडों पर शटर लगा कर उन्हें दुकानोंं में तब्दील किए जाने के बाद शटरों को हटाने की नौबत नहीं आती। बीस लाख में फडों पर शटर लगाकर उन्हें दुकानों में तब्दील किए जाने का सौदा किए जाने की बात यदि वाकई सच है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई भी जरूरी है। इतना ही नहीं यह भी सुनने में आया है कि इस मामले को लेकर अनेकों बार कैंट बोर्ड में शिकायतें भी की गईं। वो शिकायतें किसने डंप करा दीं शिकायतें क्यों नहीं सीईओ तक पहुंंच पायी, इसकी जांच बीस लाख रुपए में सौदा किए जाने से भी बड़ी बात है।
मसला भले भी कुछ हो, लेकिन फडों पर शटरों का लगा जाना और कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन के स्टाफ को उसकी भनक तक नहीं लगना बात गले नहीं उतर रही है। ये शटर एक दिन में या रात के अंधेरे में नहीं लगवा दिए गए। कई दिन तक दिन के उजाले में फडों पर शटर लगाने का काम अंजाम दिया गया। हालांकि यह बात अलग है कि मामला जब सीईओ के संज्ञान में पहुंच गया तो कार्रवाई में एक पल की भी देरी नहीं की गयी।
गरीबों के लिए हर साल होना था आवंटन
जानकारों की मानें तो सदर सब्जी मंड़ी के ये फड़ साल १९५० के आसपास आवंटित किए गए थे। जो लोग समाज के बेहद गरीब तबके से आते हैं उनके लिए कैंट बोर्ड के तब के अफसरों ने यह व्यवस्था की थी। जानकारों की मानें तो इसमें यह भी प्रावधान किया गया था कि फड़ों की हर साल नीलामी की जाएगी, यदि वाकई ऐसा था तो कब से हर साल नीलामी कर फड़ों के आवंटन का प्रावधान रोक दिया गया और जिन्हें फड आवंटित किए गए थे उन्होंने कैसे मुस्तकिल तौर पर फड़ों को कब्जा लिया। यह काम कैंट बोर्ड के रेवेन्यू स्टाफ की मदद के बगैर संभव नहीं है।