ओल्ड ग्रांट का बंगला 210, आवासीय बंगले में कारोबारी गतिविधियां, विवाह मंडप कर रहा है धनवर्षा, कैंट बोर्ड काे एक पाई नहीं
मेरठ। छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 210 डीईओ यानि रक्षा संपदा अधिकारी का बंगला है। इसका स्वरूप आवासीय है, लेकिन सालों पहले इस बंगले में कारोबारी गतिविधियां शुरू कर दी गयी हैं। इसमें विवाह मंडप और वैकट हाॅल बना दिया है, जिससे हर माह लाखों की कमाई की जा रही है, लेकिन हैरानी इस बात है कि इस लाखों की कमाई से कैंट बोर्ड के खजाने में एक पाई नहीं आ रही है और ना ही कैंट बोर्ड के अफसरों ने कभी इस बात पर तवज्जो दी कि 210 में हो रही धनवर्षा की कुछ छींटे सरकारी खजाने यानि कैंट बोर्ड पर भी पड़ें। जिन्होंने इस बंगले का कारोबारी प्रयोग शुरू किया है वो कैंट बोर्ड को कभी कुछ देंगे ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता और कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन का स्टाफ खुद आगे बढ़कर सरकारी जाने के लिए कमाई का कोई रास्ता तलाशेगा इसके आसा नजर नहीं आ रहे हैं। बंगले के स्टेटस की बात करें तो इसको पूरी तरह से खुर्दबुर्द किया जा रहा है।
इनके नाम पर दर्ज है जीएलआर में
डीईओ के बंगला 210 की यदि बात की जाए तो जीएलआर में यह बंगला तलज जमानी, अशफाक, इकबाल मोहम्मद खान और जावेद मोहम्मद खान के नाम दर्ज है। जीएलआर में तभी से ये नाम चले आ रहे हैं। इस दौरान इस बंगले में कई बार अवैध निर्माण किए जा चुके हैं। अलाटमेंट के वक्त जो बंगले का स्वरूप था यानि तब जिस प्रकार से यह नजर आता था, वैसा अब कुछ भी नहीं है। इसका स्वरूप पूरी तरह से बदला जा चुका है। पुराने स्वरूप की यदि अफसर बात करें तो डीईओ आफिस के अफसर खुद भी इस बंगले को पहचान ना पाएंगे।
महाराज विवाह मंडप हुआ था ध्वस्त
साल 2000 में अवैध तरीके से तमीर किया गया महाराजा विवाह मंडप जो इस बंगले का हिस्सा था उसको ध्वस्त कियाा गया था। तब उस कार्रवाई से पूरे छावनी इलाके में भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया था। अफरा-तफरी फैल गयी थी। आज से करीब पच्चीस साल पहले हुई उस कार्रवाई की धमक पूरे छावनी इलाके में उन लोगाें में दहशत फैलाने को काफी थी तो ओल्ड ग्रांट के बंगलों पर बुरी नजर रखते हैं और उनका कारोबारी इस्तेमाल कर रहे हैं।
वक्त के साथ बदलता रहा इस्तेमाल का तरीका
वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 210 का कारोबारी यूज तो अरसे पहले से शुरू हो गया था, लेकिन इसके यूज का तरीके कई बार बदला। कारोबारी यूज की शूरूआत तो महाराज विवाह मंडप बनाकर कर दी गयी थी, उसके बाद प्रेमी टैंट वालों ने यहां विवाह मंडप शुरू कर दिया था। जानकार बताते हैं कि प्रेमी टैंट वालों के सुधीर प्रेमी को इसका बड़ा हिस्सा मिल जाने के बाद उन्होंने उससे अकूत धन संपद कमाई लेकिन कभी भी सरकारी खजाने में कुछ गया हो, ऐसी कोई जानकारी नहीं है, हां यह बात अलग है कि कारोबारी इस्तेमाल में मददगार साबित होने वाले कैंट बोर्ड के स्टाफ की जेबें जरूर भर दी गयी थीं। वो सिलसिला आज भी जारी बताया जाता है। इन दिनों कारोबारी इस्तेमाल ग्रांड कैसल बनाकर किया जा रहा है। इसके पिछले हिस्से के भी कारोबारी इस्तेमाल की बात सुनने में आ रही है। वहां कुछ निर्माण किया गया है। हालांकि सीईओ और डीईओ के स्टाफ ने मौका मुआयना किया है। लगता है कि वहां भी कारोबारी इस्तेमाल की तैयारी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि बंगले के कारोबारी से हर सीजन में लाखों करोड़ कमाने वाले सरकारी खजाने को क्या दे रहे हैं।