
प्रदर्शनकारियों को “फसाद फिल अर्द” (पृथ्वी पर बिगाड़ फैलाना) करार, ईश के खिलाफ जंग का आरोप, मौत से कम सजा नहीं दी जा सकती
नई दिल्ली/तेहरान। धार्मिक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन या प्रदर्शन के शक में जिन्हें सजा दी जा रही है वो चलती फिरती लाश की मानिंद बन गए हैं। ईरानी हुकूमत इन लोगों को कठोर से कठोरतम सजा दे रही है। पूरी दुनिया में उसकी निंदा तो की जा रही है, लेकिन धार्मिक सरकार को रोकने की हिम्मत ना तो अमेरिका जुटा पा रहा है और ना ही मानवाधिकार संगठन। हालात इतने ज्यादा खराब हैं कि लोग मौत मांग रहे हैं लेकिन उन्हें लाश बनकर जीने की सजा दी जा रही है। हालांकि ईरानी सरकार इन आरोपों से इनकार करती है, कहती है कि “रायटर्स” को सजा मिल रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी माना जा रहा है। UN हाई कमिश्नर ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या रुकनी चाहिए। ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों (दिसंबर 2025 से शुरू हुई नई लहर) के दौरान प्रदर्शनकारियों फांसी या अन्य रूपों में त्वरित मौत देने की खबरें सामने आई हैं। यह मुख्य रूप से जनवरी 2026 में चरम पर पहुंची, जब ईरानी सरकार ने विरोध को कुचलने के लिए भारी बल प्रयोग किया।
ईशा के खिलाफ जंग
जो लोग प्रदर्शनों में शामिल रहे उन पर ईश के खिलाफ यानि इस्लाम के खिलाफ जंग के आरोप लगाए गए हैं। मुस्लिम कम्युनिटी में यह आरोप सबसे घिनौना माना जाता है इसमें मौत से काम सजा नहीं दी जा सकती। ऐसा ही ईरान में हो रह है। वहां प्रदर्शनकारियों को “फसाद फिल अर्द” (पृथ्वी पर बिगाड़ फैलाना) करार दिया जा रहा है। यह आरोप मौत की सजा वाला है।
वेलेंटाइन डे पर सजा ए मौत
26 साल के प्रदर्शनकारी Erfan Soltani को 8 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। परिवार को बताया गया कि उन्हें मौत की सजा मिली और 14 जनवरी को फांसी होनी है (केवल कुछ दिनों में ट्रायल पूरा)। Hengaw और BBC ने रिपोर्ट किया कि एक्जीक्यूशन पोस्टपोन हो गई, लेकिन ईरानी ज्यूडिशियरी ने मौत की सजा से इनकार किया जा रहा है।
कन्फर्म्ड मौत का वर्डिक्ट
18 साल के रेसलिंग चैंपियन Saleh Mohammadi को Qom में जनवरी 2026 प्रदर्शनों से जुड़े मामले में पब्लिक एक्जीक्यूशन की सजा मिली (qesas – retribution-in-kind)। Amnesty ने इसे पहला कन्फर्म्ड मौत का वर्डिक्ट बताया जनवरी 2026 अपराइजिंग का। टॉर्चर से जबरन कन्फेशन लिए गए। ईरान में ऐसे मामलों की भरमार है।
बेड पर मारी जा रही गोली
प्रदर्शनों में शामिल लोगों को अस्पतालों में बेड पर ही गोली मारकर सजा दी जा रही है। (Daily Mail, Amnesty) में कहा गया कि घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पताल बेड पर ही गोली मारकर मार दिया जा रहा है (सिर में शॉट, मशीनों से जुड़े होने पर भी)। कुछ को फोरेंसिक मॉर्ग में जिंदा बॉडी बैग में डालकर ले जाया गया। अब तक हजारों को ऐसी सजा दी जा चुकी है। हालांकि हर बार ईरानी सरकार इससे इंकार करती है।