शिव और पार्वती का विवाह हुअ था महाशिव रात्री को, अनेक कथाएं प्रचलित, देश भर में श्रद्धा व उल्लास से मनायी जा रही है शिव रात्री
नई दिल्ली। पूरे देश में आज महाशिव रात्री का पर्व परंपरागत श्रद्धा व उल्लास से मनाया जा रहा है। पूरे साल में दो शिवरात्री आती हैं, लेकिन महाशिवरात्री यही है जो रविवार को मनायी जा रही है। देश के तमाम शिव मंदिरों को इस मौके पर करीने से सजाया गया है। कुछ शिव भक्त महाशिवरात्री पर हरिद्धार व ऋषिकेश तथा नीलकंठ से गंगाजल लाकर महादेव का अभिषेक करते हैं। हिन्दू धर्म का यह प्रमुख पव्र माना जाता है। इस दिन लोग व्रत व पूजन करते हैं तथा मंदिरों में जाकर जलाभिषेक करते हैं। मेरठ के बेगमपुल पीएम शर्मा रोड स्थित पंचमुखी मंदिर के पुजारी पंड़ित विवेक शर्मा महाशिवरात्री व्रत पूजन पर अनेक कथाएं बताते हैं।
सृष्टि के प्रारंभ का दिन
मान्यता है कि महाशिवरात्री के दिन ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ है। एक कथा के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु जी में अपने श्रेष्ठता को लेकर अहंकार हाे गया था। दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया था। ऐसा लगता था मानों तीनों लोकों का प्रलय हो जाएगा। यह देखकर नारद जी बहुत घबरा गए और दौड़े-दौड़े कैलाश पर्वत पहुंचे और पूरा वाक्या सुना दिया। तब वहां जहां ब्रह्मा और विष्णु में संग्राम हो रहा था, वहां महादेव पहुंच गए। दोनों को शांत किया। तभी वहां एक शिवलिंग उत्पन्न हुआ। ब्रह्मा और विष्णु जी उस शिवलिंग के आगे नतमस्त हो गए।
शिव और भवानी का विवाह
एक अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं। यह पूजा व्रत रखने के दौरान की जाती है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग अर्चना भी करते हैं महादेव शिव शंभो भवानी…
शिव ने पिया था हलाहल विष
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि समुंद्र मंथन तय था और उससे अमृत निकलेगा यह भी सभी जानते थे और यह भी जानते थे कि हलाहल विष भी मंथन से ही निकलेगा। लाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे। महादेव ने इस विष को अपने कण्ठ में रख लिया था। यह इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव अत्यधिक दर्द से पीड़ित हो उठे थे और उनका गला नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव शंकर का नाम नीलकण्ठ महादेव पड़ गया। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जगाये रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिन्तन में एक सतर्कता रखी। शिव को आनंदित करने और जागाये रखने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाये। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।