सुबह 11 बजे निगम पहुंच गए थे पार्षद, संजय सैनी के नेतृत्व में देना चाहते थे ज्ञापन, अधिकार क्षेत्र से परे जाकर लाखों का खर्च करने का लगाया आरोप
मेरठ। चीफ के कक्ष में नगर निगम के पार्षद इंतजार करते रहे, लेकिन चीफ प्रमोद सिसौदिया साढे़ बजे तक भी निगम नहीं पहुंचे। उसके बाद पार्षदों के सब्र का बांध टूटने लगा और उन्होंने पार्षद कक्ष में ही धरने का एलान कर दिया। उनका कहना था कि आज वह चीफ से मिलकर ही जाएंगे। सारे पार्षद निगम स्थित चीफ के कक्ष में ही धरना देकर बैठ गए। यहां यह भी बता दें कि धरने का एलान करने वाले पार्षदों में कई भाजपाई पार्षद भी शामिल रहे।
यह है मामला
पार्षद संजीव सैनी ने बताया कि जितने भी सरकारी बंगले हैं वो सब जिलाधिकारी के आधीन आते हैं। ऐसा ही एक बंगला नगरायुक्त के कैंप कार्यालय के बराबर में है, इस बंगले में अब तक कई लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। नियमानुसार नगरायुक्त केवल 10 लाख रुपए तक की रकम अपनी कलम से खर्च करने का अधिकार रखते हैं। महापौर को केवल 15 लाख रुपए तक का काम कराए जाने का अधिकार है। लेकिन जिस बंगले की यहां बात की जा रही है, उस बंगले में अब तक कई लाख की रकम खर्च की जा चुकी है। यह रकम किस की अनुमति और बगैर टेंडर कराए कैसे खर्च की जा रही है, उसका उत्तर मांगने ही आज निगम चीफ से मिलने के लिए आए हैं। पार्षदों ने इस संवाददाता को बताया कि चीफ को लगाकार कॉल की जा रही है, लेकिन वह बार-बार यही कह रहे हैं कि आ रहे हैं। रास्ते में हैं। पार्षदों ने बताया कि वह सुबह 11 बजे निगम स्थित चीफ के कक्ष में पहुंच गए थे, लेकिन तीन बजे के बाद तक भी वह निगम नहीं पहुंचे और बार-बार एक ही उत्तर होता कि पहुंच रहे हैं, रास्ते में हैं। ऐसा कौन सा रास्ता था जो उन्हें पार करने में चार घंटे लग गए।
तो फिर पब्लिक से क्या मिलेंगे
पार्षदों ने इस संवाददाता को बताया कि जब चीफ को पार्षदों से मिलने का वक्त नहीं है तो फिर वो पब्लिक से क्या मिलेंगे। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे से दोपहर बाद के साढे़ तीन बजे का समय हो रहा है, अभी तक तो चीफ आए नहीं है। पूरा महानगर समस्याओं की चपेट में है। लेकिन चीफ ही नहीं निगम का कोई भी अफसर इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा है। पार्षदों ने शिकायत की कि अधिकारी निरंकुश हो गए हैं।
ये रहे मौजूद
चीफ कक्ष में धरने पर बैठने की बात करने वालों में संजय सैनी, फजल करीम, पवन चौधरी, गंगा प्रसाद, अनिल वर्मा, अजय चंद्रा, नरेश सैनी, निरंजन, रचित गुलाटी के अलावा भी करीब दूसरे दर्जन भर पार्षद मौजूद थे।