व्यापार प्रतिनिधि मंडल का ज्ञापन

kabir Sharma
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अपर खाद्य आयुक्त को व्यापार प्रतिनिधि मंडल का ज्ञापन, लोकेश अग्रवाल ने बतायी क्या हैं व्यापारियों की समस्याएं, व्यापारियों को मिले राहत

मेरठ। व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने व्यापारियों की तमाम समस्याओं को लेकर अपर आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन को ज्ञापन दिया। प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल के द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन की १२ लाख टर्न ओवर की सीमा को ४० लाख किया जाए, फूड एक्ट का लाइसेंस न पाए जाने पर सजा पर रोक लगे, खाद्य पदार्थों के व्यापार की ऑनलाइन फूड चेन सप्लाई व मल्टी नेशनल कम्पनियों की पर रोक लगे व साथ ही सप्लाई करने वालों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता की जाए।

रिटेलर नहीं कर सकता मिलावट

लोकेश अग्रवाल ने बताया कि कभी भी खाद्य पदार्थों की पैकिंग की आईटम में रिटेल का व्यापारी कोई मिलावट या कमी नहीं कर सकता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में दिये गये पैकिंग एण्ड लेवलिंग एक्ट के कानूनों को पूरा करने में रिटेल व थोक के व्यापारी का कोई योगदान नहीं है। पैकिंग कम्पनियों द्वारा तैयार कर भेजी जाती है, जिसमें रिटेल का व्यापारी कोई मिलावट या पैकिंग में कोई संशोधन नहीं कर सकता है। न्याय निर्धारण अधिकारी द्वारा सिर्फ पैकिंग करने वाले फर्म या कम्पनी को ही दोषी माना जाए, होलसेलर व रिटेलर को दण्डित न किया जाये।

मल्टी नेशनल कंपनी व फूड सप्लाई चेन की चैकिंग क्यों नहीं

मल्टी नेशनल कम्पनी व फूड सप्लाई चेन के सामानों की सैम्पलिंग नहीं की जा रही है, उनकी सेंपलिंग की जाए। सैम्पिल लेते समय रिटेल के व्यापारियों को लिये गये सामान का भुगतान नहीं किया जा रहा है व फार्म 5 क भरकर मौके पर नहीं दिया जाता है, जिससे व्यापारी का उत्पीड़न हो रहा है। सैम्पिल भरे जाते समय फार्म-5 क पूरी तरह से भरकर व्यापारी को मौके पर उपलब्ध कराऐं तथा सैम्पिल के लिए प्राप्त किये गये सामान का भुगतान व्यापारी को करना सुनिश्चित करें एवं सील बंद वस्तु की संपलिंग की जाने की दशा में निर्माता को फार्म 5 क पंजीकृत डाक द्वारा तुरंत भेजा जाए। सैम्पलिंग के समय व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों को मौके पर बुलाया जाए, जिससे सही प्रकार सैम्पलिंग की कार्यवाही पूर्ण हो सके तथा व्यापारी का उत्पीड़न न हो सके तथा व्यापारी से विभाग के बिचैलियों द्वारा किसी भी प्रकार की अवैध वसूली न हो सके।

इसके लिए व्यापारी नहीं जिम्मेदार

खेती में कीटनाशक व रासायनिक खाद डालने का मानक तय नहीं है। अंधाधुंध कीटनाशक व रासायनिक खादों का प्रयोग खेती में किया जा रहा है। सिंचाई के लिए प्रयोग किये जाने वाला जल पूरी तरीके से दूषित हो चुका है, जिससे हमारे यहॉ के खेती से प्राप्त होने वाले खाद्ययान में रासायन व कीटनाशक भारी मात्रा में पाए जा रहे हैं, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। परन्तु खाद्यय सुरक्षा मानक अधिनियम के मानकों में बदलाव नहीं किया गया है। अत: आपसे अनुरोध है कि वर्तमान परिस्थिति के अनुसार खाद्यय पदार्थों के मानक तय किये जायें तथा कृषि विभाग को खेती में प्रयोग होने वाले कीटनाशक व रासायनिक खाद के मानक तय करने के लिए लिखा जाए। जब तक नए सिरे से मानक तय नहीं किये जाते हैं। व्यापारियों के सैम्पिल न भरे जाएं। ऑनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न निर्धारित समय पर जमा न करने पर रू0 100 प्रतिदिन लेट फीस लगाई जा रही है, जिन व्यापारियों की पूर्व में रिटर्न जमा नहीं है, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। रिटर्न जमा करने पर पिछला मांगा जा रहा जुर्माना समाप्त किया जाए। निर्माताओं से प्रत्येक छ: माह में खाद्यय पदार्थों की जांच एन.ए.बी.एल. लैब से कराकर जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड़ कराई जा रही हैं। एन.ए.बी.एल. लैब सरकार द्वारा निर्धारित की गई है। एन.ए.बी.एल. लैब से जांच रिपोर्ट अपलोड़ होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा सैम्पलिंग की जा रही है। सैम्पलिंग की दोहरी व्यवस्था पर रोक लगाई जाए। सैपलिंग का टारगेट सिस्टम बंद हो। नमूना $फेल होने पर अधोमानक की जगह असुरक्षित लिख कर रिपोर्ट भेजी जा रही है, यह कार्यवाही खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रविधानों के बिलकुल विरुद्ध है। जबतक नमूने की जांच में कोई हानिकारक वस्तु न पायी जाए, नमूने को असुरक्षित घोषित न किया जाए।

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पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए

प्रशासनिक अधिकारी अपर जिला मजिस्ट्रेट आदि को न्याय निर्णयक अधिकारी राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किये गये हैं। प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे न्याय निर्णय में समय लगता है। समय लगने से व्यापारी उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता है तथा तकनीकी जानकार न होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी मात्र अधिकतम जुर्माना वसूल करना चाहते हैं वह वाद को गुण दोषों के आधार पर तय करने की इच्छा नहीं रखते। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (फूड एक्ट) के लिये पूर्णकालिक न्याय निर्णायक अधिकारी की नियुक्ति की जानी आवश्यक है, जिससे व्यापारी को शीघ्र न्याय मिल सके।

अपील अभिकरण की स्थापना करें

लोकेश अग्रवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के सभी मामलों को अदालतों में भेजा जा रहा है। एक्ट में दी गई धारा-69 के अनुसार अधिकांश मामलों को शमन शुल्क जमा कराकर समाप्त किया जा सकता है। अधिकांश सभी विभागों में भी अनावश्यक मुकदमें आदि से बचने के लिए शमन शुल्क जमा कर मुकदमा समाप्त करने की व्यवस्था की गई है। शमन शुल्क व्यवस्था लागू करने से सरकार पर भी अनावश्यक मुकदमों के बोझ का भार कम होगा। अत: अभिहीत अधिकारी कार्यालय में शमन शुल्क जमा कराने की व्यवस्था लागू की जाए। खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम में अपीलों की सुनवाई के लिए जिला जज को अधिकृत किया गया है, जिससे अपीलकर्ता को न्याय मिलने में अधिक समय लगता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 की धारा-70 के अनुसार खाद्य सुरक्षा अपील अभिकरण की स्थापना की जाये, जिसमें सिर्फ खाद्यय सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की सुनवाई हो।

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