सेंट्रल मार्केट बेबस हैं व्यापारी

kabir Sharma
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बचाने के लिए खुद ही तोड़ रहे हैं सेंट्रल मार्केट के व्यापारी, आवास विकास परिषद ने जहां तक निशान लगाए हैं वहां से शुरू किया तोड़ना तोड़ने के बाद भी चेंज ऑफ परपज वाले भवनों को राहत की नहीं कोई उम्मीद

सेंट्रल मार्केट के व्यापारी बड़े आंदोलन व धरना प्रदर्शन की तैयारी में, ज्ञापन दिया, बड़ा सवाल जो साथ लगे हैं क्या वो दिला सकेंगे राहत

मेरठ। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की बेबसी को समझा जा सकता है लेकिन जिन्हें वाकई समझना चाहिए शायद वो नहीं समझ रहे हैं वर्ना कोई वजह नहीं कि सुप्रीमकोर्ट में खड़े होकर कहा जाता कि ये अवैध नहीं है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा और व्यापारी मजबूर और बेबस नजर आ रहे हैं। उन्हें कोई ऐसा रास्ता नहीं नजर आ रहा जिस पर कोई उनका हाथ पकड़ कर चले।

ताकि किसी तरह जाए बच

सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद के हाथों उजड़ने से अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने अब खुद ही अपने प्रतिष्ठान का बड़ा हिस्सा तोड़ना शुरू कर दिया है। सेंट्रल मार्केट स्थित गणपति प्लाजा का आज बड़ा हिस्सा तोड़ना शुरू कर दिया। दरअसल दो दिन पहले आवास विकास परिषद प्रशासन ने सेंट्रल मार्केट में जो डिमार्केशन यानि क्रास के लाल निशान लगाए थे, उनका कहना है कि जहां तक अवैध माना गया है वहां तक तो तोड़ने को तैयार हैं।

तोड़कर भी तो राहत नहीं

वहीं दूसरी ओर भी इस मामले से जुड़े विधि विशेषज्ञों की मानें तो यदि दुकानदार तोड़ भी दें तो भी उन्हें राहत की उम्मीद कम है। दरअसल सेंट्रल मार्केट की जिन ३१ दुकानों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई आवास विकास परिषद को करनी है, वो कार्रवाई आवासीय भवन के चेंज ऑफ परपज यानि उपयोग के उद्देश्य कमें बदलाव को लेकर की जानी है। सेंट्रल मार्केट के गणपति प्लाजा सरीखे व्यापारी जो अपनी दुकान तोड़ रहे हैं वो अवैध निर्माण तक सीमित है, सुप्रीमकोर्ट के आदेश उसके मुतालिक नहीं है, बल्कि भवन के चेंज ऑफ परपज को लेकर है। ये आदेश आवासीय भवनों के व्यवसायिक प्रयोग को लेकर हैं। जिस प्रकार से 661/6कांप्लैक्स का प्रकरण था ठीक उसी तरह को सेंट्रल मार्केट की इन 31 दुकानों का मामला है। यदि सेटबेक छोड़कर दस-दस फुट तक ध्वस्त भी कर देंते हैं तो भी 15 मार्च को सुप्रीमाकोर्ट में कृत कार्रवाई को लेकर आवास विकास परिषद को जो साक्ष्य सौंपने हैं उसमें ऐसे भवनों को भी ध्वस्त कर उनके भी साक्ष्य सौंपने हैं। उन्हें किसी प्रकार की राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

आंदोलन व धरने प्रदर्शन की तैयार

सेंट्रल मार्केट के जिन दुकानदारों के ऊपर आवास विकास परिषद की कार्रवाई की तलवार लटक रही है, उनको बचाने के लिए अब पूरा सेंट्रल मार्केट आंदोलन के मूड में है। जानकारों की मानें तो वहां के कारोबारी बड़े आंदोलन के अलावा धरने प्रदर्शन की तैयारी में हैं। इस बार इन्हें समाजवादी पार्टी के नेताओं का पूरा साथ मिल रहा है। यह भी संभव है कि इसके आंदोलन में सपा के कोई बड़े नेता पहुंच जाएं।

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चीफ जस्टिस को ज्ञापन

सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की ओर से मेरठ व्यापार मंडल ने गुरूवार को जिला प्रशासन की मार्फत एक ज्ञापन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भेजा। ज्ञापन देने वाले जिलाध्यक्ष जीत सिंह नागपाल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इनमें शैंकी वर्मा भी शामिल रहे। एडवोकेट उमाशंकर खटीक, राहुल मलिक, संजय, सुदीप जैन, विशाल बंसल, प्रकाश ए प्रसाद, संजीव रस्तौगी, ओमकार सिंह, वरूण जैन सचिन रस्तौगी, यश मल्होत्रा, प्रशांत शर्मा, नितिन, नीरज, वसीम, नईम आदि भी शामिल रहे। ज्ञापन में मुख्य न्यायधीश से ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक की मांग की गयी है।

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