रिकबरी पर त्यौहारी इफैक्ट, राजस्व में दर्ज की गयी गिरावट, राहत की उम्मीद में बड़ी संख्या में निगम पहुंच रहे हैं लोग, पिछले साल से करीब-करीब डलब टारगेट
मेरठ। नगर निगम का हाउस टैक्स रिकबरी का टारगेट पिछले साल के अनुपात में इस साल लगभग दोगुना है। उसके बावजूद करीब अस्सी फीसदी रिकबरी तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी ओर हाउस टैक्स रिकबरी पर अब त्यौहारी इफैक्ट पड़ रहा है। रमजान और होली सरीखे पर्व के चलते रिकबरी में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकिे मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिव कुमार गौतम का कहना है कि उनकी टीमें लगातार फिल्म में सक्रिय हैं। वार्ड स्तर पर कैंप लगाए जा रहे हैं। उन कैंपों में जो भी शंका हाउस टैक्स को लेकर है उनका समाधान भी किया जा रहा है और लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि हाउस टैक्स को जमा कराया जाना अनिवार्य है। इसलिए कोई यह ना समझे कि इस साल ना जमा कराएंगे तो अगले साल जमा करा देंगे। ऐसे मामलों में पैनल्टी भी संभव है।
लोगों को राहत की दरकार
इन दिनों नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंच रहे हैं जिनको बिलों पर रियायत की दरकार है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिव कुमार गौतम ने बताया कि ज्यादातर ऐसे मामले हैं जिनमें कई साल का बिल जमा नहीं किया गया है। जब जीआईएस सर्वे के बाद बढ़ी हुई दरों का बिल पहुंचा तो लोग निगम दौड़ लगा रहे हैं। वो राहत चाहते हैं और राहत भी ऐसी कि जो उनके यहां जीआईएस सर्वे से पहले की दर से बिल पहुंचते उसी दर से उन्हें हाउस टैक्स के बिल में राहत चाहिए। ऐसा किया जाना अब जीआईएस सर्वे के बाद संभव नहीं है। क्योंकि इसकी मॉनिटरिंग कई स्तर से की जा रही है। जो भी लोग आ रहे हैं उन्हें यही समझाया जा रहा है कि कुछ भी कर बिल को जमा किया जाए। शिव कुमार गौतम बताते हैं कि हाउस टैक्स का कोई बिल यदि बीस लाख का आया है तो वह 15 या 18 तक तो हो सकता है लेकिन कोई यह सोचे कि 2 लाख का हो जाएगा तो संभव नहीं है। हाउस टैक्स रिकबरी के लिए इन दिनों निगम का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इनसे भी किया गया है आग्रह
हाउस टैक्स रिकबरी के लिए नगर निगम प्रशासन ने सांसद, विधायक, महापौर तथा क्षेत्र के दूसरे संभ्रांत लोगो ंकी मार्फत लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि हाउस टैक्स के बिल जमा करें। इसमें देरी से भवन स्वामी का ही नुकसान है। जहां तक राहत की बात है तो वो बात तो समझ में आती है, लेकिन यह संभव नहीं है कि राहत के इंतजार में बिल ही जमा ना किया जाए।