होली ऐसा पर्व है जहां मस्ती भी है और श्रीकृष्ण व श्रीराधा की भक्ति भी, होली के अलग अलग स्वरूप, इस बार हाेली पर ग्रहण, एक दिन लेट है होली
नई दिल्ली/वृंदावन। देश और दुनिया में मस्ती और रंगों के पर्व होली की धूम है। होली की मस्ती और भक्ति की यदि बात करें तो ब्रज की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि तीन लोकों मेंं सबसे न्यारी होली ही ब्रज में खेली जाती है। ब्रज में होली कई दिन पहले शुरू हो जाती है और कई दिन बाद तक खेली जाती है। हाेली का पर्व ब्रजवासियों खासतौर से वृंदावन वालों के लिए अद्भुत होता है। यहां श्रीबांके बिहारी जी का मंदिर है तो इस्कॉन में होली के पर्व की अलग ही छटा होती है। इस्कॉन की होली खेलने के लिए पूरी दुनिया से विदेशी वृंदावन धाम पहुंचते हैं। मथुरा-वृंदावन में बसंत पंचमी से ही होली उत्सव शुरू हो चुका है। पुणे में एक होली कार्यक्रम में स्टेज गिरने की घटना हुई, लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं। होलाष्टक (23 फरवरी से 3 मार्च तक) में शुभ कार्य वर्जित हैं।
होली की कथा और व्यथा
होली, जिसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है। होली की मुख्य कथा भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह, भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकशिपु से जुड़ी हुई है।
प्राचीन काल में एक शक्तिशाली असुर राजा हिरण्यकशिपु था, जिसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में; न घर में, न बाहर; न मनुष्य से, न पशु से; न अस्त्र से, न शस्त्र से। इस वरदान से अहंकारी होकर वह स्वयं को भगवान मानने लगा और प्रजा से अपनी पूजा करवाने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और वह पिता के आदेश की अवहेलना कर विष्णु की भक्ति करता रहा।
हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को कई बार समझाया और दंडित किया, लेकिन प्रह्लाद नहीं डिगा। अंत में, हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, ताकि प्रह्लाद जल जाए। लेकिन भगवान की कृपा से होलिका जल गई और प्रह्लाद सकुशल बच गया। इसी घटना की याद में होलिका दहन मनाया जाता है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है।
इसके बाद, हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद पर हमला किया, लेकिन भगवान विष्णु नरसिंह अवतार (आधा सिंह, आधा मनुष्य) में प्रकट हुए और संध्या काल में द्वार की देहलीज पर, अपनी जांघों पर रखकर हिरण्यकशिपु का वध किया, जिससे सभी वरदानों का पालन हुआ। यह कथा सिखाती है कि सच्ची भक्ति के आगे कोई शक्ति नहीं टिक सकती।
सबसे न्यारी होली श्रीराधा कृष्ण की
इसके अलावा, होली से जुड़ी अन्य कथाएं हैं, जैसे राधा-कृष्ण की लीला, जहां कृष्ण राधा और गोपियों के साथ रंग खेलते थे, जो प्रेम और उल्लास का प्रतीक है। कुछ क्षेत्रों में कामदेव की कथा भी जुड़ी है, जहां शिव ने कामदेव को भस्म किया था, लेकिन बाद में उन्हें पुनर्जीवित किया।
भांति भाति की होली
उत्तर प्रदेश में ब्रज के बरसाना जी में लठमार होली तो पंजाब में होला मोहल्ला (सिख योद्धाओं का प्रदर्शन), मणिपुर में याओसांग (पांच दिनों का सांस्कृतिक उत्सव), और हम्पी में बोहेमियन कार्निवल जैसे आयोजन होंगे। वृंदावन में 4 मार्च को हेरिटेज पब्लिक स्कूल में विशेष कार्यक्रम है।